अथ चतुःषष्टि भैरव नामावलिः
64 भैरवों के नामों का अत्यंत शक्तिशाली संग्रह
मैं आपको एक ऐसा अद्भुत और शक्तिशाली नाम संग्रह बताने जा रहा हूँ जो श्रीरुद्रयामल तंत्र में वर्णित है। यह है चतुःषष्टि भैरव नामावलिः - भगवान भैरव के 64 स्वरूपों के नामों का अद्भुत संकलन।
क्या है चतुःषष्टि भैरव नामावलि?
भैरव भगवान शिव के ही एक स्वरूप हैं, जो रक्षक, संहारक और तंत्र के अधिपति माने जाते हैं। भैरव के अनेक स्वरूप हैं और इस नामावली में उनके 64 प्रमुख स्वरूपों के नाम दिए गए हैं।
यह नामावली केवल नामों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह उन 64 शक्तियों का आह्वान है जो भैरव के विभिन्न रूपों में विद्यमान हैं।
इस नामावली के अद्भुत लाभ:
सभी भयों से मुक्ति - भैरव भयहरण करने वाले हैं
शत्रु नाश - शत्रुओं का संहार होता है
तंत्र बाधा से रक्षा - नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा
ग्रह बाधा निवारण - कुंडली के दोष दूर होते हैं
आध्यात्मिक उन्नति - साधना में सफलता मिलती है
मोक्ष की प्राप्ति - आध्यात्मिक मुक्ति
धन-समृद्धि में वृद्धि - आर्थिक स्थिति सुधरती है
यह है संपूर्ण चतुःषष्टि भैरव नामावलि:
```
॥ अथ चतुःषष्टिभैरवनामावलिः ॥
असिताङ्गो विशालाक्षो मार्तण्डो मोदकप्रियः ।
स्वच्छन्दो विघ्नसन्तुष्टः खेचरः सचराचरः ॥ १॥
रुरुश्च क्रोड-दंष्ट्रश्च तथैव च जटाधरः ।
विश्वरूपो विरूपाक्षो नानारूपधरः परः ॥ २॥
वज्रहस्तो महाकायश्चण्डश्च प्रलयान्तकः ।
भूमिकम्पो नीलकण्ठो विष्णुश्च कुलपालकः॥ ३॥
मुण्डमालः कामपालः क्रोधो वै पिङ्गलेक्षणः ।
उग्ररूपो धरापालः कुटिलो मन्त्रनायकः ॥ ४॥
रुद्रः पितामहाख्यश्च व्युन्मत्तो बटुनायकः ।
शङ्करो भूत-वेतालस्त्रिनेत्रस्त्रिपुरान्तकः ॥ ५॥
वरदः पर्वतावासः कपालः शशिभूषणः ।
हस्तिचर्माम्बरधरो योगीशो ब्रह्मराक्षसः ॥ ६॥
सर्वज्ञः सर्वदेवेशः सर्वभूतहृदिस्थितः ।
भीषणाख्यो भयहरः सर्वज्ञाख्यस्तथैव च ॥ ७॥
कालाग्निश्च महारौद्रौ दक्षिणो मुखरोऽस्थिरः ।
संहारश्चातिरिक्ताङ्गो कालाग्निश्च प्रियङ्करः ॥ ८॥
घोरनादो विशालाङ्गो योगीशो दक्षसंस्थितः ।
चतुःषष्टीरूपधृग्देवो भैरवः स सदाऽवतु ॥ ९॥
॥ इति श्रीरुद्रयामले तन्त्रे
चतुःषष्टिभैरवनामावलिः सम्पूर्णा ॥
```
सरल अर्थ - 64 भैरवों के नाम:
प्रथम श्लोक के 8 नाम:
1. असिताङ्गः - काले शरीर वाले
2. विशालाक्षः - विशाल नेत्रों वाले
3. मार्तण्डः - सूर्य के समान तेजस्वी
4. मोदकप्रियः - मोदक प्रिय (लड्डू पसंद)
5. स्वच्छन्दः - स्वतंत्र विचरण करने वाले
6. विघ्नसन्तुष्टः - विघ्नों से संतुष्ट होने वाले
7. खेचरः - आकाश में विचरण करने वाले
8. सचराचरः - चर-अचर सबमें व्याप्त
द्वितीय श्लोक के 8 नाम:
1. रुरुः - रुरु नामक भैरव
2. क्रोडदंष्ट्रः - विशाल दाढ़ों वाले
3. जटाधरः - जटा धारण करने वाले
4. विश्वरूपः - विश्व रूप धारण करने वाले
5. विरूपाक्षः - विकृत नेत्रों वाले
6. नानारूपधरः - अनेक रूप धारण करने वाले
7. परः - परम श्रेष्
तृतीय श्लोक के 8 नाम:
1. वज्रहस्तः - हाथों में वज्र धारण करने वाले
2. महाकायः - विशाल शरीर वाले
3. चण्डः - उग्र स्वभाव वाले
4. प्रलयान्तकः - प्रलय का अंत करने वाले
5. भूमिकम्पः - भूकंप उत्पन्न करने वाले
6. नीलकण्ठः - नीले कंठ वाले (शिव स्वरूप)
7. विष्णुः - विष्णु स्वरूप
8. कुलपालकः - कुल की रक्षा करने वाले
चतुर्थ श्लोक के 8 नाम:
1. मुण्डमालः - मुण्डों की माला पहनने वाले
2. कामपालः - कामनाओं की पूर्ति करने वाले
3. क्रोधः - क्रोध स्वरूप
4. पिङ्गलेक्षणः - पिंगल नेत्रों वाले
5. उग्ररूपः - उग्र रूप वाले
6. धरापालः - पृथ्वी की रक्षा करने वाले
7. कुटिलः - कुटिल (रहस्यमय) स्वरूप
8. मन्त्रनायकः - मंत्रों के स्वामी
पंचम श्लोक के 8 नाम:
1. रुद्रः - रुद्र स्वरूप
2. पितामहः - ब्रह्मा स्वरूप
3. व्युन्मत्तः - मस्त (उन्मत्त) स्वरूप
4. बटुनायकः - बटुकों के स्वामी
5. शङ्करः - कल्याण करने वाले
6. भूतवेतालः - भूत-प्रेतों के स्वामी
7. त्रिनेत्रः - तीन नेत्रों वाले
8. त्रिपुरान्तकः - त्रिपुर का नाश करने वाले
षष्ठ श्लोक के 8 नाम:
1. वरदः - वरदान देने वाले
2. पर्वतावासः - पर्वतों पर निवास करने वाले
3. कपालः - कपाल धारण करने वाले
4. शशिभूषणः - चन्द्रमा से अलंकृत
5. हस्तिचर्माम्बरधरः - हाथी की खाल पहनने वाले
6. योगीशः - योगियों के स्वामी
7. ब्रह्मराक्षसः - ब्रह्मराक्षस स्वरूप
सप्तम श्लोक के 7 नाम:
1. सर्वज्ञः - सब कुछ जानने वाले
2. सर्वदेवेशः - सभी देवताओं के स्वामी
3. सर्वभूतहृदिस्थितः - सभी प्राणियों के हृदय में निवास करने वाले
4. भीषणः - भयानक स्वरूप
5. भयहरः - भय का हरण करने वाले
6. सर्वज्ञः (पुनः) - सर्वज्ञ (बल देने के लिए)
7. तथैव च - इसी प्रकार
अष्टम श्लोक के 8 नाम:
1. कालाग्निः - कालाग्नि स्वरूप
2. महारौद्रः - महारौद्र स्वरूप
3. दक्षिणः - दक्षिण मुखी भैरव
4. मुखरः - मुखर (बोलने वाले)
5. अस्थिरः - अस्थिर (गतिशील)
6. संहारः - संहार करने वाले
7. अतिरिक्ताङ्गः - अतिरिक्त अंगों वाले
8. प्रियङ्करः - प्रिय करने वाले
नवम श्लोक के 3 नाम:
1. घोरनादः - भयंकर नाद करने वाले
2. विशालाङ्गः - विशाल अंगों वाले
3. दक्षसंस्थितः - दक्षिण दिशा में स्थित
तथा: चतुःषष्टी रूपधृक् देवः - 64 रूप धारण करने वाले देव
तथा: भैरवः - भैरव
पूरी साधना विधि:
आसन और वस्त्र:
लाल आसन बिछाएँ (भैरव को लाल रंग प्रिय है)
लाल वस्त्र पहनें (यदि संभव हो)
काले वस्त्र भी पहन सकते हैं
समय:
प्रातःकाल - सूर्योदय से पहले
रात्रि - विशेष रूप से रात्रि में भैरव साधना उत्तम
अष्टमी और चतुर्दशी का विशेष महत्व
मंगलवार और शनिवार - भैरव के दिन
कालरात्रि - दीपावली की रात विशेष
📝 विधि:
चरण 1: स्नान करें - स्वच्छ होकर लाल या काले वस्त्र पहनें
चरण 2: लाल आसन पर बैठें - दक्षिण दिशा की ओर मुख करें
चरण 3: संकल्प लें - हाथ में जल लेकर कहें:
"मैं (अपना नाम, गोत्र) भैरव भगवान की कृपा से सभी भयों से मुक्ति एवं शत्रु नाश हेतु इस चतुःषष्टि भैरव नामावली का पाठ करूंगा/करूंगी।"
चरण 4: भैरव का ध्यान करें - काले रंग, त्रिशूल, डमरू, खड़ग धारण किए, भयंकर दाढ़ों वाले, ज्वालाओं से युक्त भैरव का ध्यान करें
चरण 5: नामावली का पाठ करें - 1, 3, 5, 7 या 11 बार पाठ करें
चरण 6: भोग लगाएँ - लाल फूल, लाल चंदन, लाल मिठाई (बेसन के लड्डू), शराब (यदि तांत्रिक साधना है), उड़द की दाल, तेल का दीपक
चरण 7: आरती करें - भैरव जी की आरती करें
चरण 8: क्षमा प्रार्थना - अंत में क्षमा प्रार्थना करें
दोस्तों, इस नामावली का पाठ करते समय थोड़ा सा होश रखिए। देखिए कि कैसे भैरव की भयंकर शक्ति आपके चारों ओर एक सुरक्षा कवच बना रही है। हर नाम के साथ महसूस करें कि उस विशेष शक्ति का आह्वान हो रहा है।
बस देखते रहिए। साक्षी बने रहिए। जब साक्षी भाव आएगा, तो यह साधना और भी गहरा असर दिखाएगी।
अंतिम बात:
दोस्तों, भैरव भगवान शिव के ही स्वरूप हैं और वे भक्तों की रक्षा के लिए सदा तत्पर रहते हैं। यह चतुःषष्टि भैरव नामावली उनके 64 स्वरूपों का आह्वान है। इसके नियमित पाठ से जहाँ एक ओर सभी भय दूर होते हैं, वहीं दूसरी ओर शत्रुओं का भी नाश होता है।
यह नामावली उन सभी के लिए वरदान है जो जीवन में सुरक्षा, संरक्षण और सफलता चाहते हैं।
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