1. गुरु यदि लग्न में होतो पूर्वजों की आत्मा का आशिर्वाद या दोष दर्शाता है। अकेले में या पूजा करते वक्त उनकी उपस्थिति का आभास होता है। ऐसे व्यक्ति को अमावस्या के दिन दूध का दान करना चाहिए।
.
2. दूसरे अथवा आठवें स्थान का गुरु दर्शाता है कि व्यक्ति पूर्व जन्म में सन्त या सन्त प्रकृति का या और कुछ अतृप्त इच्छाएं पूर्ण न होने से उसे फिर से जन्म लेना पड़ा। ऐसे व्यक्ति पर अदृश्य प्रेत आत्माओं के आशीर्वाद रहते है। अच्छे कर्म करने तथा धार्मिक प्रवृति से समस्त इच्छाएं पूर्व होती हैं। ऐसे व्यक्ति सम्पन्न घर में जन्म लेते है। उत्तरार्ध में धार्मिक प्रवृत्ति से पूर्ण जीवन बिताते हैं। उनका जीवन साधारण परंतु सुखमय रहता है और अन्त में मौत को प्राप्त करते है।
.
3. गुरु तृतीय स्थान पर हो तो यह माना जाता है कि पूर्वजों में कोई स्त्री सती हुई है और उसके आशीर्वाद से सुखमय जीवन व्यतीत होता है किन्तु शापित होने पर शारीरिक, आर्थिक और मानसिक परेशानियों से जीवन यापन होता है। कुल देवी या मॉ भगवती की आराधना करने से ऐसे लोग लाभान्वित होते हैं।
.
4. गुरु चौथे स्थान पर होने पर जातक ने पूर्वजों में से वापस आकर जन्म लिया है। पूर्वजों के आशीर्वाद से जीवन आनंदमय होता है। शापित होने पर ऐसे जातक परेशानियों से ग्रस्त पाये जाते हैं। इन्हें हमेशा भय बना रहता है। ऐसे व्यक्ति को वर्ष में एक बार पूर्वजों के स्थान पर जाकर पूजा अर्चना करनी चाहिए और अपने मंगलमय जीवन की कामना करना चाहिए।
.
5. गुरु नवें स्थान पर होने पर बुजुर्गों का साया हमेशा मदद करता रहता हैं। ऐसा व्यक्ति माया का त्यागी और सन्त समान विचारों से ओतप्रोत रहता है। ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ती जाती है वह बली, ज्ञानी बनता जाएगा। ऐसे व्यक्ति की बददुआ भी नेक असर देती है।
.
6. गुरु का दसवें स्थान पर होने पर व्यक्ति पूर्व जन्म के संस्कार से सन्त प्रवृत्ति, धार्मिक विचार, भगवान पर अटूट श्रळा रखता है। दसवें, नवें या ग्यारहवें स्थान पर शनि या राहु भी है, तो ऐसा व्यक्ति धार्मिक स्थल, या न्यास का पदाधिकारी होता है या बड़ा सन्त। दुष्टध्प्रवृत्ति के कारण बेइमानी, झूठ, और भ्रष्ट तरीके से आर्थिक उन्नति करता है किन्तु अन्त में भगवान के प्रति समर्पित हो जाता हैं ।
.
7. ग्यारहवें स्थान पर गुरु बतलाता है कि व्यक्ति पूर्व जन्म में तंत्रा मंत्र गुप्त विद्याओं का जानकार या कुछ गलत कार्य करने से दूषित प्रेत आत्माएं परिवारिक सुख में व्यवधान पैदा करती है। उस जातक को मानसिक अशान्ति हमेशा रहती है। ऐसे जातक को राहू की युति से विशेष परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति को मां काली की आराधना करना चाहिए और संयम से जीवन यापन करना चाहिए।
.
8. बारहवें स्थान पर गुरु, गुरु के साथ राहु या शनि का योग पूर्वजन्म में इस व्यक्ति द्वारा धार्मिक स्थान या मंदिर तोडने का दोष बतलाता है और उसे इस जन्म में पूर्ण करना पडता है। ऐसे व्यक्ति को अच्छी आत्माएं अदृश्य रुप से साथ देती है। इन्हें धार्मिक प्रवृत्ति से लाभ होता है। गलत खान-पान से तकलीफों का सामना करना पड़ता है।
Friday, March 17, 2017
गुरु
राहु -केतु निर्मित शुभाशुभ योग
राहु -केतु निर्मित शुभाशुभ योग
.
१...अष्ट लक्ष्मी योग ....जन्मांग में राहु छठे स्थान में
और वृहस्पति केंद्र में हो तो अष्ट लक्ष्मी योग बनता
हैं | इस योग के कारण जातक धनवान होता हैं और
उसका जीवन सुख शांति के साथ व्यतीत होता हैं |
.
२..मोक्ष योग ...जन्मांग में वृहस्पति और केतु का
युति दृष्टि सम्बन्ध हो तो मोक्ष योग होता हैं |
यदि केतु गुरु की राशी और वृहस्पति उच्च राशी कर्क
में हो तो मोक्ष की सम्भावना बढ़ जाती हैं |
.
३..परिभाषा योग ...तीसरे छठे ,दसवे या ग्यारहवे
भाव में राहु शुभ होकर स्थित हो तो परिभाषा
योग का निर्माण करता हैं | ऐसा राहु जातक को
कई प्रकार की परेशानियों से बचा लेता हैं | इनमे
स्थित राहु दुसरे ग्रहों के अशुभ प्रभाव को भी कम
करता हैं |
.
४..अरिष्ट भंग योग ..मेष ,वृष या कर्क लग्न में राहु
नवम ,दशम या एकादश भाव में स्थित हो तो अरिष्ट
भंग योग बनता हैं जो अपने नाम के अनुसार ही कई
प्रकार के अरिष्टो का नाश करता हैं |
.
५...लग्न कारक योग ...यदि लग्नेश अपनी उच्च राशी
या स्वराशी में हो और राहु लग्नेश की राशी में
स्थित हो तो लग्न कारक योग बनता हैं | यह योग
भी जातक को शुभ फल प्रदान करता हैं |
.
६..कपट योग ...जन्मांग में चौथे भाव में शनि और
बारहवे भाव में राहु हो तो कपट योग बनता हैं | ऐसे
जातक पर विश्वास सोच समझकर करना चाहिए |
.
७..पिशाच योग ..लग्न में चन्द्र और राहु स्थित हो
तो पिशाच योग बनता हैं | ऐसे जातको को नजर
दोष ,तंत्र कर्म ,उपरी बाधा के कारण परेशानी
होती हैं | इन्हे योग्य ज्योतिषाचार्य का परामर्श
अवश्य समय रहते प्राप्त कर लेना चाहिए |
.
८..काल सर्प योग ..जब राहु और केतु के मध्य सभी
ग्रह आ जाये तो काल सर्प योग बनता हैं | यह योग
ज्यादातर कष्ट कारक होता हैं | २० प्रतिशत यह
योग विशेष ग्रह स्थितियों के कारण शुभ फल भी
देता हैं |
.
९..राहु और चन्द्र की युति से चन्द्र ग्रहण होने पर
चन्द्र मन और कल्पना का कारक होकर पीड़ित
होता हैं | तब जातक का मन किसी कार्य में नही
लगेगा तो पतन निश्चित हैं |ऐसे जातक मानसिक रोग
,पागलपन के शिकार भी होते हैं | सूर्य ग्रहण होने पर
जातक आत्मिक रूप से परेशां रहता हैं |जातक को
राजकीय सेवा में परेशानी रहती हैं और जातक को
पिता की तरफ से भी परेशानी रहती हैं .
.
६. मंगल राहु का योग होने पर जातक की तर्क शक्ति
प्रभावित रहती हैं- ऐसा जातक आलसी भी होता
हैं जिससे प्रगति नही कर पाता | ऐसा जातक हिंसक
भी होता हैं |अपने क्रोध पर ये नियंत्रण नही कर
पाते| इनमे वासना भी अधिक रहती हैं |
.
७.बुध राहु का योग होने पर जड़त्व योग का निर्माण
होता हैं | यदि बुध कमजोर भी हो तो बोध्धिक
कमजोरी के कारण प्रगति नही कर पायेगा |इस योग
वाला जातक सनकी ,चालाक होता हैं कई बार ऐसे
जातक भयंकर बीमारी से भी पीड़ित रहते हैं |
.
८. गुरु राहू का योग होने पर चांडाल योग का
निर्माण होता हैं |गुरु ज्ञान और पुण्य का कारक हैं
यदि जातक शुभ प्रारब्ध के कारण सक्षम होगा तो
अज्ञान और पाप प्रभाव के कारण शुभ प्रारब्ध के
फल को स्थिर नही रख पायेगा |जातक में सात्विक
भावना में कमी आ जाती हैं |
.
९.शुक्र राहू योग से अमोत्वक योग का निर्माण
होता हैं | शुक्र को प्रेम और लक्ष्मी का कारक
माना जाता हैं |प्रेम में कमी और लक्ष्मी की कमी
सभी असफलताओ का मूल हैं |ऐसे जातक में
चारित्रिक दोष भी रहता हैं
.
१०.शनि राहू योग से नंदी योग बनता हैं शनि राहू
दोनों पृथकता करक ग्रह हैं | इसीलिए इनका प्रभाव
जातक को निराशा की और ले जायेगा |
ग्रहों के कारकत्व
ग्रहों के कारकत्व
1. प्रथम भाव (तनु) – इस भाव का कारक सूर्य है। इसमे मिथुन, कन्या, तुला और कुंभ राशियों मे से कोई राशि हो, तो उसे बलवान माना जाता है।
2. दूसरा भाव (धन) – इस भाव का कारक गुरू है।
3. तीसरा भाव (सहज) – इस भाव का कारक मंगल है।
4. चतुर्थ भाव (सुख) – इस भाव का कारक चंद्र और बुध है।
5. पंचम भाव (पुत्र) – इस भाव कारक गुरू है।
6. पष्ठ भाव (रिपु) – इस भाव का कारक मंगल और शनि है।
7. सप्तम भाव (जाया) – इस भाव का कारक शुक्र है।
8. अष्टम भाव (आयु) – इस भाव का कारक शनि है।
9. नवम भाव (धर्म) – इस भाव का कारक गुरू और रवि है।
10. दशम भाव (कर्म) – इस भाव का कारक रवि, बुध, गुरु और शनि है।
11. एकादश भाव (लाभ) – इस भाव का कारक गुरू है।
12. द्वादश भाव (व्यय) – इस भाव का कारक शनि, शुक्र है।
कारक
सूर्य
आत्मा, अहम्, सहानुभूति प्रभाव, यश, स्वास्थ्य, दाएँ नेत्र, दिन, ऊर्जा, पिता, राजा, राजनीति, चिकित्सा विज्ञान गौरव, पराक्रम का कारण है।
चन्द्रमा
मन, रुचि, सम्मान, निदा्र , पा्र सन्नता, माता, सत्ता, धन, यात्रा, जल का कारक है। मंगल शक्ति, साहस, पराक्रम, प्रतियोगता, क्रोध, उत्तेजना, षडयन्त्र, शत्रु, विपक्ष विवाद, शस्त्र, सेनाध्यक्ष, युद्ध दुर्घटना जलना, घाव, भूमि, अचल सम्पत्ति छोटा भाई, चाचा के लड़के, नेता, पुलिस सर्जन, मैकेनिकल इंजीनियर का कारक है।
बुध
बुद्धिमता, वाणी पटुता, तर्क, अभिव्यक्ति, शिक्षा, गणित, ज्याेितषी, लेखाकार, व्यापार, कमीशन एजेंट, प्रकाशन राजनीति में मध्यवर्ती व्यक्ति, नृत्य, नाटक, वस्तुओं का मिश्रण पत्तेवाले पेड़, मूल्यवान पत्थरों की परीक्षा मामा, मित्र सम्बन्धि आदि।
बृहस्पति
विवेक, बुद्धिमता, शिक्षण, शरीर की मांसलता, धार्मिक कार्य ईश्वर के प्रति निष्ठा, बडा़ भाई, पवित्र स्थान, दार्शिकता, धामिर्क ग्रन्थ का पठन, पाठन, गुरु, अध्यापक, धन बैंक, तीना कम्पनियां , दान देना, परोपकार फलदार वृक्ष, पुत्र आदि।
शुक्र
पति/पत्नी, विवाह, रतिक्रिया, प्रम सम्बन्ध, संगीत, काव्य, इत्र सुगन्ध, घर की सजावट ऐश्वर्य, दूसरों के साथ सहयोग, फूल फूलदार वृक्ष, पौधे सौंदर्य, आखों की रोशनी, आभूषण, जलीय स्थान, सिल्कन कपड़ा, सफेद रंग, वाहन, शयन कक्ष आदि सुख सामग्री आदि।
शनि
आयु, दुख, रोग, मृत्यु संकट अनादर, गरीबी, आजीविका, अनैतिक तथा अधार्मिक कार्य, विदेशी भाषा, विज्ञान तथा तकनीकी शिक्षा मेहनत वाले कार्य, कृषीगत व्यवसाय, लोहा, तेल, खनिज पदार्थ, कर्मचारी, सेवक नौकरियां, वृद्ध मन्ति, पंगुता, अगंभगं, लाभ, लालच बिस्तर पर पड़े रहना, चार दिवारी में बन्द रहना, जेल, हास्पीटल में पड़े रहना, वायु, जोड़ों के दर्द, कठोरवाणी आदि।
राहु
दादा का कारक गृह है कठोर वाणी, जुआ, भ्रामक तर्क, गतिशीलता, यात्राए, विजातीय लोग, विदेशी लोग, विष, चोरी.दुष्टता, विधवा, त्वचा की बिमारिया, होठ. धामिर्क यात्राए, दर्द आदि।
केतु
नाना का कारक ग्रह है। दर्द, ज्वर, घाव, शत्रुओं को नुकसान पहुंचाना, तांत्रिक तन्त्र, जादू-टोना, कुत्ता, सींग वाले पशु, बहुरंगी पक्षी, मोक्ष का कारक ग्रह है।
Saturday, March 4, 2017
स्वास्थ्य और बीमारी
स्वास्थ्य और बीमारी
इस बात पर निर्भर करती है कि दूसरे घर के ग्रह आठवें घर को बचाने में कितने सक्षम हैं। आठवें घर के ग्रह सदैव वक्र दृष्टि से दूसरे घर को देखते हैं। दूसरा घर आठवें घर का द्वार है। आठवें घर से ही रोग व मृत्यु का निर्धारण किया जाता है, साथ ही साथ दूसरे, छठे, बारहवें घर का भी विश्लेषण किया जाता है।वषर्फल में तीसरे व पांचवे घर में आने वाले ग्रह
स्वास्थ्य, फिजूलखर्च, धन की प्राप्ति और मृत्यु को बताते हैं। भले ही दूसरे घर का ग्रह मृत्यु को रोकने वाला हो फिर भी ग्यारहवे घर का ग्रह धोखा देगा और आठवां मृत्यु का कारक होगा। पांचवां घर टकराव के लिए तथा बारहवां व तीसरा घर बीमारी तथा मृत्यु के फैसले के लिए न्यायाधीश होगा। रक्त से संबंधित जो रोग हैं वे रक्त का प्रवाह असंतुलित होने या
रक्त में प्रदूषण के कारण होते हैं। रक्त से संबंधित रोग
हीमोग्लोबिन कम होना, इंसोमेनिया, हाइपरटेंशन, कैंसर,
ट्यूमर, हार्टअटैक, हैपेटाइटिस आदि हैं।यहां तक कि मधुमेह
भी मंगल व शुक्र का संबंध असंतुलित होने के कारण होता है। जब भी किसी व्यक्ति को इन रोगों के कारण परेशानी होती है, मंगल ग्रह का सही विश्लेषण हम दो स्थिति में कर सकते हैं।कुंडली का पहला घर यानी एक नंबर राशि में मंगल शुभ होता है और अक्सर राजयोग कारक होता है।पर वृश्चिक राशि यानी आठवीं राशि का मंगल मारक होता है अर्थात मंगल बद होता है। किसी कुंडली में मंगल के साथ, बृहस्पति या चंद्र हो तो मंगल बद नहीं होता है। शुभ मंगल शुभ फल देता है और अगर कुंडली में मंगल शुभ है और उसके साथ बृहस्पति, सूर्य अथवा चंद्र शुभ फल दे रहे हैं तो ऐसा व्यक्ति अक्सर शासक होता है।चंद्र का संबंध मन से है। चंद्र पानी भी है, इसी प्रकार यदि मंगल, चंद्र दोनों में से कोई दूषित है तो निश्चित ही मनुष्य रक्तचाप, हाइपरटेंशन से पीड़ित होगा। सूर्य, बुध की युति व दृष्टि से हो या साथ-साथ होने से वही फल देगी जो अकेला मंगल देता है और सूर्य अथवा बुध
इनमें से कोई एक दूषित अथवा अशुभ है और चंद्र से संबंध हो जाता है तो निश्चित ही जातक को मानसिक तनाव,
रक्तचाप अथवा हार्टअटैक होगा। इसको दूर करने के लिए कुंडली का पूर्ण विश्लेषण करें और यह देखें कि चंद्र व मंगल में से कौन सा ग्रह अशुभ फल दे रहा हैे। इसी आधार पर सूर्य, बुध की युति से मंगल बन रहा है और उसका चंद्र से
संबंध हो गया है तो कहीं ने कहीं दोष होने से उपरोक्त बीमारियां मनुष्य को घर कर सकती है।
ज्योतिष की कुछ जानकारी
ज्योतिष की कुछ जानकारी
जन्म समय ,दिन मान तिथि स्थान से हम जातक के जन्म कुंडली बनाते है जो जन्म के समय गोचर ग्रह हो और उसी से उसके पूरे जीवन पर होने वाले शुभ अशुभ
आदि के बारे में सटीक भविष्य वाणी करते हे , ऐसे ज्योतिष मत अनुसार 27 योगों मेसे 9 योग जो अत्यंत अशुभ माने गए है एवम पंचांग के 11 करणो में से 5 अशुभ ये शुभ अशुभ योग उनकी जिन ग्रहों की युति में हो उन की दशा अंतर दशा में जातक को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है , वही शुभ योग की दशा
अंतर दशा में वे लाभ एवम अन्य सुखों का भोग करवाते हे ,सर्व प्रथम जो जन्म समय पर भाग्य में लिखा छठी का अंक कोई नही बदल सकता ये पूर्व जन्मों के संचय
कर्मो का फल ही होता है जो शुभ अशुभ आप को भोगना पड़ता है ओर ऐसे ही परिवार में जन्म भी होता है
जो आप के पूरक हे,यँहा अशुभ ग्रह जैसे चांडाल योग हैतो गुरुओ से बड़े बुजुर्ग ज्ञानियों से आप को धुत्कार मिले सही होने पर भी आप की उपेक्छा हो परन्तु एक कर्म जो
आप को करना है कि भले ही कितना ही ना आप का अपमान हो आप सदा गुरु का आदर करो , रोज़ चरण स्पर्श करो कभी भी उन की बात न टालो बड़े बुजुर्गों का आदर करो ज्ञानियों का सम्मान करो न की स्वयम ज्ञान बाटना चालु क्र र दो ब्रहस्पतिवार को गुरु पूजा करो कर्म से ब्राह्मण हे उन्हें पिली वास्तु वस्त्र आदि का दान कर भोज करवाओ और इन सभी अच्छी आदत को अपने नित्य कर्म में ले लो
इससे ये पक्का हे की जब भी राहु में ब्रहस्पति की या ब्रहस्पति में राहु का भृमण हों गा उस समय आप को बड़ी हानि नही होगी और जीवन में जँहा भी आप के मार्ग अवरुद्घ हो रहे होंगे वो समय आप का संघर्ष कई गुना घट गया होगा , क्योकि जैसे बुरे काम का बुरा नतीजा तो अच्छे काम कर्म का अच्छा शुभ फल प्राप्त करने से कोई नही रोक सकता, ये चांडाल योग हेतु ,इसी प्रकार सभी दोषों की शान्ति हेतु कुछ कर्म जो नित्य पुरे जीवन भर के लिए उतार लेना बड़ी बात है और वोआप के बुरे समय में आप उबार लेंगे ,क्योकि शान्ति कर्म कुछ वर्ष उपरान्त फिर दोहराने पड़ते है जो जब ग्रह ज्यादा कुपित हो तो उस की शान्ति अवश्य करवाए ये वैदिक शान्ति पाठ सभी जानते है,परन्तु हम कुछ तांत्रिक विधि विशेष दिवश पर जैसे मंगल ,बुद्ध ,शनि ,अमावश्या , ग्रहण आदि में करवाते हे और कुछ क्रियाए जो आप अपने घर से रहते हुए मेरे मार्ग दर्शन में कर सकते हे उनमें
कई उपाय हर सप्ताह के विशेष दिवस को होता है जो 3 , 5 , 7 , 9 , बार हो सकता है और कुछ जिस ख़ास तिथि दिन से आरम्भ कर 11 , 21 , 43 , 108 दिनों तक रोज चलता हे ,आप को कोई चमत्कार की बात करता हे और आप ऐसा चाहते है तो वो आप की श्रद्धा से कर्म से ही संभव है मार्ग दर्शन हम कर सकते हे विधि विधान
पूजा अर्चना करवा सकते हे परन्तु जँहा फ़लित होने की बात है वो आप की श्रद्धा भाव समर्पण पर निर्भर करता है और जो हतेली में चाँद बता कर आप को बड़े बड़े दावे करते हे तो उनका क्या होता है पता नही पर जो इन के चक्कर में लूटते हे वो ऐसे हतप्रभ होते है ।
*1).चांडाल योग=गुरु के साथ राहु या केतु हो तो जातकको चांडाल दोष है*
*2).सूर्य ग्रहण योग=सूर्य के साथ राहु या केतु हो तो*
*3). चंद्र ग्रहण योग=चंद्र के साथ राहु या केतु हो तो*
*4).श्रापित योग -शनि के साथ राहु हो तो दरिद्री योग होता ह*ै
*5).पितृदोष- यदि जातक को 2,5,9 भाव में राहु केतु या शनि है तो जातक पितृदोष से पीड़ित है.*
*6).नागदोष - यदि जातक को 5 भाव में राहु बिराजमान है तो जातक पितृदोष के साथ साथ नागदोष भी है.*
*7).ज्वलन योग- सूर्य के साथ मंगल की युति हो तो जातक ज्वलन योग(अंगारक योग) से पीड़ित होता है*
*8).अंगारक योग- मंगल के साथ राहु या केतु बिराजमान हो तो जातक अंगारक योग से पीड़ित होता है.*
*9).सूर्य के साथ चंद्र हो तो जातक अमावस्या का जना है*
*10).शनि के साथ बुध = प्रेत दोष.*
*11).शनि के साथ केतु = पिशाच योग.*
*12).केमद्रुम योग- चंद्र के साथ कोई ग्रह ना हो एवम् आगे पीछे के भाव में भी कोई ग्रह न हो तथा किसी भी ग्रह की दृष्टि चंद्र पर ना हो तब वह जातक केमद्रुम योग से पीड़ित होता है तथा जीवन में बोहोत ज्यादा परिश्रम अकेले ही करना पड़ता है.*
*13).शनि + चंद्र=विषयोग शान्ति करें*
*14).एक नक्षत्र जनन शान्ति -घर के किसी दो व्यक्तियों का एक ही नक्षत्र हो तो उसकी शान्ति करें.*
*15).त्रिक प्रसव शान्ति- तीन लड़की के बाद लड़का या तीन लड़कों के बाद लड़की का जनम हो तो वह जातक सभी पर भारी होता है*
*16).कुम्भ विवाह= लड़की के विवाह में अड़चन या वैधव्य योग दूर करने हेतु.*
*17).अर्क विवाह = लड़के के विवाह में अड़चन या वैधव्य योग दूर करने हेतु.*
*18).अमावस जन्म- अमावस के जनम के सिवा कृष्ण चतुर्दशी या प्रतिपदा युक्त अमावस्या जन्म हो तो भी शान्ति करें*
*19).यमल जनन शान्ति=जुड़वा बच्चों की शान्ति करें.*
*पंचांग के 27 योगों में से 9 "अशुभ योग*
*1.विष्कुंभ योग.*
*2.अतिगंड योग.*
*3.शुल योग.*
*4.गंड योग.*
*5.व्याघात योग.*
*6.वज्र योग.*
*7.व्यतीपात योग.*
*8.परिघ योग.*
*9.वैधृती योग.*
*पंचांग के 11 करणों में से 5 अशुभ करण*
*1.विष्टी करण.*
*2.किंस्तुघ्न करण.*
*3.नाग करण.*
*4.चतुष्पाद करण.*
*5.शकुनि करण*
*नक्षत्र जिनकी शान्ति करना जरुरी है*
*1).अश्विनी का- पहला चरण(1)अशुभ है.*
*2).भरणी का - तिसरा चरण.(3).अशुभ है.*
*3).कृतीका का - तीसरा चरण.(3).अशुभ है.*
*4).रोहीणी का - पहला,दूसरा और तीसरा चरण.(1,2,3).अशुभ है.*
*5).आर्द्रा का - चौथा चरण.(4).अशुभ है.*
*6).पुष्य नक्षत्र का - दूसरा और तीसरा चरण.(2,3).अशुभ है.*
*7).आश्लेषा के-चारों चरण(1,2,3,4).अशुभ है*
*8)-मघा का- पहला और तीसरा चरण.(1,3).अशुभ है*
*9).पूर्वाफाल्गुनी का-चौथा चरण(4).अशुभ है*
*10).उत्तराफाल्गुनी का- पहला और चौथा चरण.(1,4).अशुभ है*
*11).हस्त का- तीसरा चरण.(3).अशुभ है.*
*12).चित्रा के-चारों चरण.(1,2,3,4).अशुभ है*
*13).विशाखा के -चारों चरण.(1,2,3,4).अशुभ है.*
*14).ज्येष्ठा के -चारों चरण(1,2,3,4)अशुभ है*
*15).मूल के -चारों चरण.(1,2,3,4).अशुभ है.*
*16).पूर्वषाढा का- तीसरा चरण.(3).अशुभ है.*
*17).पूर्वभाद्रपदा का-चौथा चरण(4)अशुभ है*
*18).रेवती का - चौथा चरण.(4).अशुभ है.*
ज्योतिष ज्ञान ऐसा हे की कोई पूर्ण शुभ नही न ही अशुभ हे ,इससे आप ज्योतिष मार्ग दर्शन में वो सारे कार्य पूर्ण जीवन के लिए नियम रूप उतार ले जो एक औषधि सामान हे सही मार्ग दर्शन में और अपने गुरु
ईष्ट की शरण में सदा रहेंगे तो कोई आप का अशुभ करना तो दूर आप पर कु दृष्टि भी नही डाल सकता और यही सत्य है...
Wednesday, March 1, 2017
जन्म-समय और सूर्य
जन्म-समय और सूर्य
जन्म-समय सुबह 4 से 6 बजे आपका सूर्य पहले घर में मौजूद है। यह आपको अच्छा
स्वास्थ्य और आत्मविश्वास दे रहा है। आप किसी भी बात को लेकर दृढ़ संकल्पित रहते हैं और आपका भविष्य अच्छा है।
जन्म समय सुबह 6 से 8 बजे आपका सूर्य 12वें घर में है, यह आपकी जिंदगी में ऐसे रहस्यपूर्ण बदलाव लाएगा जिसकी व्याख्या करना मुश्किल है। सख्त दिनचर्याअपनाएं और अपने दिमाग को शांत बनाए रखें आय के मुकाबले खर्च अधिक हो सकते हैं।
जन्म समय सुबह 8 से 10 बजे आपका सूर्य 11वें घर में है। इसके मायने हैं कि आपके ढेर सारे दोस्त होंगे, सामाजि संबंध बनाने के लिए आपको पैसों की जरूरत होगी। ज्यादातर समय शुभचिंतकों और दोस्तों से हाल-चाल जानने में ही बीतेगा। आपको लगेगा कि आप जितने के हकदार हैं, उससे कहीं अधिक हासिल कर रहे हैं।
जन्म समय सुबह 10 से 12 बजे आपका सूर्य 10वें घर में मौजूद है। पश्चिमी और
भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह सूर्य का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। आप अपने प्रोजेक्ट्स और प्लान्स को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे। आप सर्वश्रेष्ठ साबित होंगे। शक्ति का दुरुपयोग आपको परेशानी में डाल सकता है।
जन्म समय दोपहर 12 से 2 बजे आपका सूर्य 9वें घर में है। यह स्थिति आपके यात्रा से भरी जिंदगी जीने, दार्शनिक,धार्मिक, तेज दिमाग, परोपकारी स्वभाव और प्रसिद्ध होने की ओर संकेत करती है। 9वां घर अच्छे भविष्य का है और आप भाग्य को अपने ऊपर मुस्कुराता महसूस कर सकते हैं। आपका स्वभाव परोपकार और दयालुता से भरा है।
जन्म समय दोपहर 2 से शाम 4 बजे आपका सूर्य आठवें घर में है जो कि मुद्रा संबंधी मामलों जैसे ऋण, ट्रस्ट, सार्वजनिक फंड, बैंक आदि में खास दखल होने का संकेतक है। कई ज्योतिषी इसे सेक्स और दुर्घटनाओं से भी जोड़कर देखते हैं।कानूनी मसलों का सामना करना पड़ सकता है।
जन्म समय शाम 4 से 6 बजे आपका सूर्य सातवें घर में है, जिसे सामान्यत: साझेदारियों का घर
कहा जाता है। शादी आपको दूसरे लोगों के मुकाबले अधिक प्रभावित करेगी। इसलिए इसे सफल बनाने का प्रयास करें, भले ही इसके लिए आपको कठिन मेहनत क्यों न करनी पड़े। ऐसे पेशे या व्यवसाय को चुनें जो आपको लोगों से सीधे संपर्क करने की आजादी देता हो। चूंकि सातवां घर आपके दुश्मनों का भी है, ऐसे में कानूनी दिक्कत आ सकती हैं।
जन्म समय शाम 6 से रात्रि 8 बजे आपका सूर्य छठवें घर में है, इसका मतलब यह है कि आपकी जिंदगी का बहुत कुछ साथियों और अधीनस्थों से आपको मिलने वाले सहयोग पर निर्भर करेगा। यह समाजसेवा की ओर भी संकेत करता है और आपको लोगों के स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा।
अत्यधिक सतर्कता और परिश्रमी होने
की आपकी आदत आपको लंबे समय तक
कामयाबी और सम्मान दिलाएगी।
जन्म समय रात्रि 8 से 10 बजे आपका सूर्य पांचवें घर में मौजूद है जो आपको कलाकार वाली क्षमता और कौशल देगा। यह आपको जिंदगी के प्रति आशावादी नजरिया और मौके तलाशने की इच्छाशक्ति देगा। आपकी रुचि व्यवसाय में तब्दील हो सकती है। आप स्टेज और वास्तविक जिंदगी, दोनों में अभिनय करने वाले महान प्रेमी साबित हो सकते हैं, लेकिन इसके
अतिरेक से बचें।
जन्म समय रात्रि 10 से 12 बजे आपका सूर्य चौथे घर में है जो घर और संपत्ति के लिहाज से बेहतरीन स्थान है। आप जमीन, रियल एस्टेट से लाभ अर्जित कर सकते हैं। आपके अभिभावक आपकी जिंदगी को बनाने या बिगाड़ने मेंउल्लेखनीय भूमिका निभा सकते हैं।
जन्म समय रात्रि 12 से 2 बजे आपका सूर्य तीसरे घर में मौजूद है जो आपकी बौद्धिक क्षमता, यात्रा करने की चाहत और उच्च स्तर के रोमांच को दर्शाता है। आप पत्रकारिता या टीवी जर्नलिज्म से जुड़ सकते हैं। आपके भाई-बहन और पड़ोसी या तो आपको बना देंगे या बिगाड़ देंगे, लेकिन यह निश्चित है कि इनका आपके
जीवन पर गहरा प्रभाव रहेगा। सूर्य की
स्थिति आपको बेहतरीन सामाजिक जीवन
देगी।
जन्म समय रात्रि 2 से तड़के 4 बजे
आपका सूर्य दूसरे घर में है। यह वित्त और परिवार का घर है। इसका मतलब है कि आप पैसे बनाने में कामयाब होंगे, भले ही आप इसे संभाल न पाएं। भारतीय ज्योतिष में दूसरे घर को वाककला और भोजन का घर माना जाता है। आप एक महान वक्ता हो सकते हैं, आपके पास पैसा भी होगा।