पितरों से मिलेगा आशीर्वाद, दूर होंगे सारे कष्ट
पितर हमारे सबसे बड़े रक्षक होते हैं। पितृ दोष से परेशान हैं? पितृ बंधन में फँसे हैं? पितृ ऋण चुकता नहीं हो रहा? पितृ श्राप से मुक्ति चाहिए? कुलदेवी प्रसन्न नहीं हैं? पितृ मुक्ति पाना चाहते हैं? पितृ तर्पण का सही फल चाहिए? तो यह उपाय आपके लिए ही है। पितरों को प्रसन्न करने का यह सबसे सरल और शक्तिशाली उपाय है।
उपाय की विधि
जब करें? – हर शनिवार की रात्रि को। शनिवार का दिन पितरों को अत्यंत प्रिय है। शनि देव भी पितरों के कारक माने जाते हैं।
कहाँ करें? – किसी ऊँचे स्थान पर, घर की छत पर, या किसी खुले स्थान पर जहाँ आकाश साफ दिखाई दे। ऊँचा स्थान पितरों तक प्रार्थना पहुँचाने का माध्यम है।
कैसे करें? – सबसे पहले एक मिट्टी का दीपक लें। उसमें सरसों का तेल भरें और काला तिल डालें। काला तिल पितरों को अत्यंत प्रिय है। दीपक प्रज्वलित करें। फिर दीपक को आसमान की ओर दिखाते हुए पितरों का ध्यान करें और नीचे दी गई प्रार्थना बोलें।
पितृ दीपदान श्लोक
ॐ उच्चस्थाने दीपकं यः प्रज्वालयति शनैश्चरे।
पितरस्तस्य तृप्यन्ति यान्ति मोक्षपदं ध्रुवम्॥
हिंदी अर्थ – हे शनि देव! जो मनुष्य शनिवार के दिन ऊँचे स्थान पर दीपक जलाता है, उसके पितर तृप्त हो जाते हैं और निश्चित रूप से मोक्ष पद को प्राप्त होते हैं।
ये पितरः प्रेतयोनिस्था ये च स्वर्गे व्यवस्थिताः।
दीपज्योतिः प्रसादेन तृप्तिं यान्तु नमोऽस्तु ते॥
हिंदी अर्थ – जो पितर प्रेत योनि में हैं और जो स्वर्ग में स्थित हैं, वे सभी इस दीपक की ज्योति के प्रसाद से तृप्त हों। उन सभी पितरों को नमस्कार है।
ॐ पितृभ्यो देवताभ्यश्च स्वधायै च नमो नमः।
तृप्यन्तु पितरः सर्वे श्राद्धभागं प्रयच्छतः॥
हिंदी अर्थ – हे पितरों! हे देवताओं! हे स्वधा देवी! आपको बार-बार नमस्कार है। मेरे द्वारा दिए गए इस दीपक और तर्पण को ग्रहण करें। मेरे सभी पितर तृप्त हों।
ॐ स्वधा पितृभ्यः स्वधा पितृभ्यः स्वधा पितृभ्यः।
पितरः प्रीयन्तां पितरः प्रीयन्तां पितरः प्रीयन्ताम्॥
हिंदी अर्थ – हे स्वधा! यह अर्पण पितरों के लिए है। पितर प्रसन्न हों, पितर प्रसन्न हों, पितर प्रसन्न हों।
स्वधा देवी का स्मरण
ॐ स्वधायै स्वधायै स्वधायै नमः।
ॐ स्वधा देव्यै नमः।
स्वधा देवी पितरों की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनके स्मरण से पितर शीघ्र प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष का नाश होता है। स्वधा देवी का स्मरण करते हुए दीपक को आसमान की ओर दिखाएँ और कुछ देर ध्यान करें।
यह उपाय करने से क्या होगा?
✦ पितृ दोष का पूर्ण नाश होगा – जीवन में आ रही सभी बाधाएँ दूर होंगी
✦ पितृ ऋण चुकता होगा – पूर्वजों के कर्ज से मुक्ति मिलेगी
✦ पितृ बंधन टूटेगा – परिवार में सुख-शांति आएगी
✦ पितृ श्राप समाप्त होगा – अकाल मृत्यु, रोग, कष्ट दूर होंगे
✦ पितर प्रसन्न होंगे – उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा
✦ पितृ मुक्ति – पितर प्रेत योनि से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होंगे
✦ पितृ तर्पण सफल होगा – पितरों को तृप्ति मिलेगी
✦ कुलदेवी प्रसन्न होंगी – कुलदेवी की कृपा से परिवार में समृद्धि आएगी
✦ पितरों की कृपा से संतान सुख, धन-धान्य, यश और कीर्ति की प्राप्ति होगी
✦ घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा
✦ पितृ पक्ष में किया गया यह उपाय अत्यंत फलदायी होता है
✦ शनि देव भी प्रसन्न होंगे – शनि दोष से मुक्ति मिलेगी
शास्त्रीय प्रमाण
शास्त्रों में कहा गया है – शनिवार का दिन पितरों को अत्यंत प्रिय है। इस दिन किया गया तर्पण, दीपदान और पितरों का स्मरण अक्षय फल देता है। ऊँचे स्थान पर दीपक जलाने से पितरों तक प्रार्थना शीघ्र पहुँचती है। स्वधा देवी पितरों की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनके स्मरण मात्र से पितर तृप्त हो जाते हैं।
ये च पितरः प्रेताः स्वधान्नपानतर्पिताः।
स्वधा देवी प्रसादेन तृप्यन्ते नात्र संशयः॥
अर्थ – जो पितर प्रेत योनि में हैं, वे स्वधा देवी की कृपा से स्वधा-अन्न-पान से तृप्त हो जाते हैं – इसमें कोई संदेह नहीं है।
ध्यान रखने योग्य बातें
✦ यह उपाय हर शनिवार को करें – जितना अधिक करेंगे, उतना अधिक लाभ होगा
✦ दीपक में सरसों का तेल और काला तिल अवश्य डालें – यह पितरों को अत्यंत प्रिय है
✦ प्रार्थना करते समय पितरों का ध्यान करें, उनकी तस्वीर या नाम स्मरण करें
✦ पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव रखें
✦ यदि पितरों के नाम पता न हों, तो सभी पितरों के लिए सामूहिक रूप से प्रार्थना करें
✦ कुलदेवी का भी स्मरण करें – कुलदेवी और पितरों का गहरा संबंध है