Thursday, August 24, 2017

कुण्डली विज्ञान(Science Of Astrology)

कुण्डली विज्ञान(Science Of Astrology)

कुंडली का पहला भाव:
वैदिक ज्योतिष में कुंडली के पहले भाव को लग्न कहा
जाता है तथा वैदिक ज्योतिष के अनुसार इसे कुंडली के
बारह घरों मेंसबसे महत्त्वपूर्ण घर माना जाता है।
किसी भी व्यक्ति विशेष के जन्म के समय
उसके जन्म स्थान पर आकाश में उदित राशि को उस व्यक्ति का लग्न
माना जाता है तथा इस राशि अर्थात लग्न को उस व्यक्ति
की कुंडली बनाते समय पहले घर में स्थान
दिया जाता है तथा इसके बाद आने वाली राशियों को
कुंडली में क्रमश: दूसरे, तीसरे ---
बारहवें घर में स्थान दिया जाता है।
किसी भी कुंडली में लग्न
स्थान अथवा पहले भाव का महत्त्व सबसे अधिक होता है तथा
जातक के जीवन के लगभग सभी
महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में इस भाव का प्रभाव पाया जाता है। जातक
के स्वभाव तथा चरित्र के बारे में जानने के लिए पहला भाव विशेष
महत्त्व रखता है तथा इस भाव से जातक की आयु,
स्वास्थ्य,सामाजिक प्रतिष्ठा तथा अन्य कई महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों
के बारे में पता चलता है। कुंडली का पहला भाव
शरीर के अंगों में सिर, मस्तिष्क तथा इसके आस-पास के
हिस्सों को दर्शाता है तथा इस भाव पर अशुभ ग्रह का प्रभाव
शरीर के इन अंगों से संबंधित रोगों,चोटों अथवा परेशानियों का
कारण बन सकता है।
कुंडली का दूसरा भाव:
कुंडली के दूसरे भाव को वैदिक ज्योतिष में धन स्थान
कहा जाता है तथा किसी भी व्यक्ति
की कुंडली में इस भाव का अपना एक विशेष
महत्त्व होता है। इसलिए किसी कुंडली
को देखते समय इस भाव का अध्ययन बड़े ध्यान से करना चाहिए।
कुंडली का दूसरा भाव कुंडली धारक के द्वारा
अपने जीवन काल में संचित किए जाने वाले धन के बारे में
बताता है तथा इसके अतिरिक्त यह भाव जातक के द्वारा संचित किए
जाने वाले सोना, चांदी, हीरे-जवाहरात तथा
इसी प्रकार के अन्य बहुमूल्य पदार्थों के बारे में
भी बताता है। किन्तु कुंडली का दूसरा भाव
केवल धन तथा अन्य बहुमूल्य पदार्थों तक ही
सीमित नहीं है तथा इस भाव से जातक के
जीवन के और भी बहुत से क्षेत्रों के बारे
में जानकारी मिलती है। दूसरा भाव जातक
की वाणी तथा उसके बातचीत
करने के कौशल के बारे में भी बताता है।
शरीर के अंगों में यह भाव चेहरे तथा चेहरे पर
उपस्थित अंगों को दर्शाता है तथा कुंडली के इस भाव
पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव होने की स्थिति में जातक
को शरीर के इन अंगों से संबंधित चोटों अथवा
बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
कुंडली का दूसरा भाव जातक की सुनने,
बोलने तथा देखने की क्षमता को भी दर्शाता
है तथा इन सभी के ठीक प्रकार से काम
करने के लिए कुंडली के इस घर का मज़बूत होना
आवश्यक है।
कुंडली का तीसरा भाव:
कुंडली के तीसरे भाव को वैदिक ज्योतिष में
बंधु भाव कहा जाता है,कुंडली का तीसरा
भाव कुंडली धारक के पराकर्म को भी दर्शाता
है तथा इसिलिए कुंडली के इस भाव को पराक्रम भाव
भी कहा जाता है।
कुंडली के इस भाव से जातक के अपने भाई-बंधुओं,दोस्
तों,सहकर्मियों तथा पड़ोसियों के साथ संबधों का पता चलता है।
किसी व्यक्ति के जीवन काल में उसके भाईयों
तथा दोस्तों से होने वाले लाभ तथा हानि के बारे में
जानकारी प्राप्त करने के लिए कुंडली के इस
भाव का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना आवश्यक है। जिन व्यक्तियों
की कुंडली में तीसरा भाव
बलवान होता है तथा किसी अच्छे ग्रह के प्रभाव में
होता है,ऐसे व्यक्ति अपने जीवन काल में अपने
भाईयों, दोस्तों तथा समर्थकों के सहयोग से सफलतायें प्राप्त करते
हैं। जबकि दूसरी ओर जिन व्यक्तियों की
जन्म कुंडली में तीसरे भाव पर अशुभ बुरे
ग्रहों का प्रभाव होता है, ऐसे व्यक्ति अपने जीवन
काल में अपने भाईयों तथा दोस्तों के कारण बार-बार हानि उठाते हैं तथा
इनके दोस्त या भाई इनके साथ बहुत जरुरत के समय पर
विश्वासघात भी कर सकते हैं।
शरीर के अंगों में यह भाव कंधों तथा बाजुओं को दर्शाता
है तथा विशेष रूप से दायें कंधे तथा दायें बाजू को। इसके अतिरिक्त
यह भाव मस्तिष्क से संबंधित कुछ हिस्सों तथा सांस लेने
की प्रणाली को भी दर्शाता है
तथा इस भाव पर किसी बुरे ग्रह का प्रभाव
कुंडली धारक को मस्तिष्क संबंधित रोगों अथवा श्व्सन
संबंधित रोगों से पीड़ित कर सकता है।
कुंडली का चौथा भाव:
कुंडली के चौथे भाव को वैदिक ज्योतिष में मातृ भाव तथा
सुख स्थान भी कहा जाता है,यह भाव जातक के
जीवन में माता की ओर से मिलने वाले योगदान
तथा जातक के द्वारा किए जाने वाले सुखों के भोग को दर्शाता है। चौथा
भाव कुंडली का एक महत्त्वपूर्ण भाव है तथा
किसी भी क्रूर ग्रह का चौथे घर अथवा
चन्द्रमा पर अशुभ प्रभाव कुंडली में मातृ दोष बना देता
है। किसी व्यक्ति के जीवन में
उसकी माता की ओर से मिले योगदान तथा
प्रभाव को देखने के लिए तथा माता के साथ संबंध और माता का सुख
देखने के लिए कुंडली के इस घर का ध्यानपूर्वक
अध्ययन करना आवश्यक है।
कुंडली का चौथा भाव व्यक्ति के ज़ीवन में
मिलने वाले सुख, खुशियों, सुविधाओं, तथा उसके घर के अंदर के
वातावरण अर्थात घर के अन्य सदस्यों के साथ उसके संबंधों को
भी दर्शाता है। किसी व्यक्ति के
जीवन में वाहन-सुख, नौकरों-चाकरों का सुख, उसके
अपने मकान बनने या खरीदने को भी
कुंडली के इस भाव से देखा जाता है।
कुंडली में चौथे भाव के बलवान होने से तथा
किसी अच्छे ग्रह के प्रभाव में होने से
कुंडली धारक को अपने जीवन काल में
अनेक प्रकार की सुख-सुविधाओं तथा ऐश्वर्यों का भोग
करने को मिलता है तथा उसे बढिया वाहनों का सुख तथा नए मकान
प्राप्त होने का सुख़ भी मिलता है। दूसरी
ओर कुंडली के चौथे भाव के बलहीन होने
की स्थिति में जातक के जीवन काल में
सुख-सुविधाओं का आम तौर पर अभाव ही रहता है।
कुंडली का चौथा भाव शरीर के अंगों में
छाती, फेफड़ों, हृदय तथा इसके आस-पास के अंगों को
दर्शाता है तथा इस भाव पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव
कुंडली धारक को छाती, फेफड़ों तथा हृदय
से संबंधित रोगों से पीड़ित कर सकता है तथा इसके
अतिरिक्त जाताकी मानसिक शांति पर बुरा प्रभाव डाल सकता
है।
कुंडली का पाँचवा भाव:
कुंडली के पाँचवे भाव को वैदिक ज्योतिष में संतान भाव
कहा जाता है तथा अपने नाम के अनुसार ही
कुंडली का यह भाव संतान प्राप्ति के बारे में बताता है।
हालांकि कुंडली के कुछ और तथ्य भी इस
विषय में अपना महत्त्व रखते है। यहां पर यह बात घ्यान देने
योग्य है कि कुंडली का पाँचवा घर केवल संतान
की उत्पत्ति के बारे में बताता है तथा संतान के पैदा हो
जाने के बाद व्यक्ति के अपनी संतान से रिश्ते अथवा
संतान से प्राप्त होने वाला सुख को कुंडली के केवल
इसी घर को देखकर नहीं बताया जा सकता
तथा उसके लिए कुंडली के कुछ अन्य तथ्यों पर
भी विचार करना पड़ता है। कुंडली का पाँचवा
भाव बलवान होने से तथा किसी शुभ ग्रह के प्रभाव में
होने से जातक स्वस्थ संतान पैदा करने में पूर्ण रुप से सक्षम
होता है तथा ऐसे व्यक्ति की संतान आम तौर पर
स्वस्थ होने के साथ-साथ मानसिक, शारीरिक तथा
बौद्भिक स्तर पर भी सामान्य से अधिक
होती है तथा समाज में अपनी एक अलग
पहचान बनाने में सक्षम होती है। दूसरी
ओर कुंडली का पाँचवा भाव बलहीन होने
की स्थिति में जातक को संतान की उत्पत्ति
में समस्याएं आती हैं।
कुंडली का पाँचवा भाव व्यक्ति के मानसिक तथा बौद्धिक
स्तर को दर्शाता है तथा उसकी कल्पना शक्ति, ज्ञान,
शिक्षा, तथा ऐसे ज्ञान तथा शिक्षा से प्राप्त होने वाले व्यवसाय,
धन तथा समृद्धि के बारे में भी बताता है।
कुंडली का पाँचवा भाव जातक के प्रेम-संबंधों के बारे में
बारे में भी बताता है।
शरीर के अंगों में कुंडली का यह भाव जिगर,
पित्ताशय, अग्न्याशय, तिल्ली, रीढ
की हड्डी तथा अन्य कुछ अंगों को दर्शाता
है। कुंडली के पाँचवे भाव पर किन्हीं
विशेष क्रूर ग्रहों का प्रभाव जातक को प्रजनन संबंधित समस्याएं
तथा मधुमेह, अल्सर तथा पित्ताशय में पत्थरी
जैसी बीमारियों से पीड़ित कर
सकता है।
कुंडली का छठा भाव:
कुंडली के छठे भाव को वैदिक ज्योतिष में अरि अथवा शत्रु
भाव कहा जाता है तथा कुंडली के इस भाव के अध्ययन
से यह पता चल सकता है कि जातक अपने जीवन
काल में किस प्रकार के शत्रुओं तथा प्रतिद्वंदियों का सामना करेगा तथा
जातक के शत्रु अथवा प्रतिद्वंदी किस हद तक उसे
परेशान कर पाएंगे। कुंडली के छठे भाव के बलवान होने
से तथा किसी विशेष शुभ ग्रह के प्रभाव में होने से
कुंडली धारक अपने जीवन में अधिकतर
समय अपने शत्रुओं तथा प्रतिद्वंदियों पर आसानी से
विजय प्राप्त कर लेता है तथा उसके शत्रु अथवा
प्रतिद्वंदी उसे कोई विशेष नुकसान पहुंचाने में आम तौर
पर सक्षम नहीं होते।
कुंडली का छठा भाव जातक के जीवन काल में
आने वाले झगड़ों, विवादों, मुकद्दमों तथा इनसे होने वाली
लाभ-हानि के बारे में भी बताता है। इसके अतिरिक्त
कुंडली के इस भाव से जातक के जीवन में
आने वाली बीमारियों तथा इन
बीमारियों पर होने वाले खर्च का भी पता
चलता है। कुंडली का छठा भाव शरीर के
अंगों में पेट के निचले हिस्से को, आँतों को तथा उनकी
कार्यप्रणाली को, गुर्दों तथा आस-पास के कुछ और अंगों
को दर्शाता है। कुंडली के इस भाव पर
किन्ही विशेष क्रूर ग्रहों का प्रभाव
कुंडली धारक को कब्ज, दस्त, कमज़ोर पाचन-शक्ति के
कारण होने वाली बीमारियों,पेट में गैस-जलन
जैसी समस्याओं, गुर्दों की
बीमारीयों तथा ऐसी
ही कुछ अन्य बीमारियों से
पीड़ित कर सकता है।
कुंडली के सातवाँ भाव:
कुंडली के सातवें भाव को वैदिक ज्योतिष में
युवती भाव कहा जाता है तथा कुंडली के
इस भाव से मुख्य तौर पर जातक के विवाह और वैवाहिक
जीवन के बारे में पता चलता है। इस प्रकार जातक के
विवाह तथा वैवाहिक जीवन से जुड़े अधिकतर प्रश्नों
के उत्तर जानने के लिए कुंडली के इस भाव का
ध्यानपूर्वक अध्ययन करना अति आवश्यक है। विवाह के
अतिरिक्त बहुत लंबी अवधि तक चलने वाले प्रेम
संबंधों के बारे में तथा व्यवसाय में किसी के साथ
सांझेदारी के बारे में भी कुंडली
के इस भाव से पता चलता है। कुंडली के सातवें भाव से
कुंडली धारक के विदेश में स्थायी रुप से
स्थापित होने के बारे में भी पता चलता है, विशेष तौर पर
जब यह विवाह के आधार पर विदेश में स्थापित होने से जुड़ा
हुआ हो।
कुंडली के आठवां भाव:
कुंडली के आठवें भाव को वैदिक ज्योतिष में रंध्र भाव
कहा जाता है तथा अपने नाम के अनुसार ही
कुंडली का यह भाव मुख्य तौर पर जातक
की आयु के बारे में बताता है। किसी
कुंडली में आठवें भाव तथा लग्न भाव अर्थात पहले घर
के बलवान होने पर या इन दोनों घरों के एक या एक से अधिक शुभ
ग्रहों के प्रभाव में होने पर जातक की आयु सामान्य या
फिर सामान्य से भी अधिक होती है जबकि
कुंडली में आठवें भाव के बलहीन होने से
अथवा इस भाव पर एक या एक से अधिक अशुभ ग्रहों का प्रभाव
होने से जातक की आयु पर विपरीत प्रभाव
पड़ता है। कुंडली का आठवां भाव वसीयत
में मिलने वाली जायदाद के बारे में,अचानक प्राप्त हो जाने
वाले धन के बारे में,किसी की मृत्यु के कारण
प्राप्त होने वाले धन के बारे में तथा किसी
भी प्रकार से आसानी से प्राप्त हो जाने
वाले धन के बारे में भी बताता है। कुंडली के
आठवां भाव पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव जातक को
बवासीर तथा गुदा से संबंधित अन्य बीमारियों
से पीड़ित कर सकता है।
कुंडली के नवां भाव:
कुंडली के नौवें भाव को वैदिक ज्योतिष में भाग्य स्थान के
नाम से जाना जाता है तथा कुंडली का यह भाव मुख्य
तौर पर जातक के पूर्व जन्मों में संचित अच्छे या बुरे कर्मों से इस
जन्म में मिलने वाले फलों के बारे में बताता है। कुंडली का
नौवां भाव जातक के पूर्वजो के साथ भी संबंधित होता है
तथा इस भाव से जातक को अपने पूर्वजो से प्राप्त हुए अच्छे या
बुरे कर्मफलों के बारे में भी पता चलता है।
कुंडली का नौवां भाव जातक की धार्मिक
प्रवृत्तियों के बारे में भी बताता है तथा
उसकी धार्मिक कार्यों को करने की रुचि एवम
तीर्थ स्थानों की यात्राओं के बारे मे
भी कुंडली के नौवें भाव से पता चलता है।
नौवें भाव पर शुभ ग्रहों का प्रभाव जातक को बहुत धार्मिक बना देता
है। कुंडली का नौवां भाव विदेशों में भ्रमण तथा
स्थायी रुप से स्थापित होने के बारे में भी
बताता है।
कुंडली का दसवां भाव:
कुंडली के दसवें भाव को वैदिक ज्योतिष में कर्म भाव
कहा जाता है,तथा कुंडली का यह भाव मुख्य रूप से
जातक के व्यवसाय के साथ जुड़े उतार-चढ़ाव तथा सफलता-
असफलता को दर्शाता है। कुंडली में दसवें भाव के
बलवान होने से तथा इस भाव पर एक या एक से अधिक शुभ ग्रहों
का प्रभाव होने से जातक को अपने व्यवसायिक जीवन
में बड़ी सफलताएं मिलतीं हैं तथा उसका
व्यवसायिक जीवन आम तौर पर बहुत सफल रहता
है। जातक के अपनी संतान के साथ संबंध तथा संतान से
मिलने वाला सुख अथवा दुख देखने के लिए भी
कुंडली के इस भाव पर विचार करना आवश्यक है।
कुंडली का ग्यारवाँ भाव:
कुंडली के ग्यारहवें भाव को वैदिक ज्योतिष में लाभ भाव
कहा जाता है तथा कुंडली का यह भाव मुख्य तौर पर
जातक के जीवन में होने वाले वित्तिय तथा अन्य लाभों
के बारे में बताता है। ग्यारहवें भाव के द्वारा बताए जाने वाले लाभ
जातक द्वारा उसकी अपनी मेहनत से
कमाए पैसे के बारे में ही बताएं, यह आवश्यक
नहीं। कुंडली के इस भाव द्वारा बताए जाने
वाले लाभ बिना मेहनत किए मिलने वाले लाभ जैसे कि
लाटरी में इनाम जीत जाना,
सट्टेबाज़ी अथवा शेयर बाजार में एकदम से पैसा बना लेना
तथा अन्य प्रकार के लाभ जो बिना अधिक प्रयास किए
ही प्राप्त हो जाते हैं, भी हो सकते हैं
कुंडली के ग्यारहवें भाव के बलवान होने पर तथा इस
भाव पर एक या एक से अधिक शुभ ग्रहों का प्रभाव होने पर
जातक अपने जीवन में आने वाले लाभ प्राप्ति के अवसरों
को शीघ्र ही पहचान जाता है तथा इन
अवसरों का भरपूर लाभ उठाने में सक्षम होता है जबकि
कुंडली के ग्यारहवें भाव के बलहीन होने
पर जातक अपने जीवन में आने वाले लाभ प्राप्ति के
अधिकतर अवसरों को सही प्रकार से समझ
नही पाता तथा इस कारण इन अवसरों से कोई विशेष
लाभ नहीं उठा पाता।
कुंडली के बारहवां भाव:
कुंडली के बारहवें भाव को वैदिक ज्योतिष में व्यय भाव
कहा जाता है तथा कुंडली का यह भाव मुख्य रुप से
जातक के द्वारा अपने जीवन काल में खर्च किए जाने
वाले धन के बारे में बताता है तथा साथ ही साथ
कुंडली का यह घर यह संकेत भी देता
है कि जातक के द्वारा खर्च किए जाने वाला धन आम तौर पर किस
प्रकार के कार्यों में लगेगा। कुंडली के बारहवें भाव के
बलवान होने की स्थिति में आम तौर पर जातक
की कमाई और व्यय में उचित तालमेल होता है तथा
जातक अपनी कमाई के अनुसार ही धन को
खर्च करने वाला होता है, जिसके कारण उसे अपने
जीवन में धन को नियंत्रित करने में अधिक कठिनाई
नहीं होती जबकि कुंडली के
बारहवें भाव के बलहीन होने की स्थिति
में जातक का खर्च आम तौर पर उसकी कमाई से अधिक
होता है तथा इस कारण उसे अपने जीवन में बहुत
बार धन की तंगी का सामना करना पड़ता है।
कुंडली का बारहवां भाव जातक की विदेश
यात्राओं के बारे में भी बताता है तथा किसी
दण्ड के फलस्वरूप मिलने वाला देश निकाला भी
कुंडली के इसी भाव से देखा जाता है।
किसी व्यक्ति का अपने परिवार के सदस्यों से दूर रहना
भी कुंडली के इस भाव से पता चल जाता
है।जातक के जीवन के किसी विशेष समय
में उसके लंबी अवधि के लिए अस्पताल जाने अथवा
कारावास में बंद होने जैसे विषयों के बारे में जानने के लिए
भी कुंडली के इस भाव को देखा जाता है।
बारहवां भाव व्यक्ति के जीवन में मिलने वाले शय्या के
सुख के बारे में भी बताता है तथा यह भाव जातक
की निद्रा के बारे में भी बताता है।
कुंडली के इस भाव पर किन्ही विशेष बुरे
ग्रहों का प्रभाव जातक को निद्रा से संबंधित रोग या परेशानियों से
पीड़ित कर सकता है।

राहु का फल (Rahu)

राहु का फल (Rahu)

प्रथम भाव में स्थित राहु का फल (Rahu in First House)
राहु फल विचार
इस भाव में स्थित राहू के मिश्रित फल कहे गए हैं। आप परोपकारी और धैर्यवान व्यक्ति हैं। यहां स्थित राहू आपके कद को ऊंचा बनाता है। आपका शरीर कभी रोगी तो कभी निरोगी रहता है। आपको धन की कमी नहीं रहेगी। कहीं न कहीं से किसी न किसी माध्यम से आपको धन की प्राप्ति होती रहेगी। आप दूसरे के धन अपने लिए प्रयोग करेंगे साथ ही उसी धन से दूसरों को भी लाभ पहुंचाना चाहेंगे।
आप अपने जीवन काल में विभिन्न भोगों का उपभोग करेंगे। आपका वेष लोगों में प्रभावशाली रहेगा। आप बडों से विनम्र व्यवहार करते हैं। आप छोटे स्तर में पैदा होकर भी बडा स्तर प्राप्त कर पाएंगे और लोगों की नजरों में श्रेष्ठता प्राप्त करेंगे। आप साहसिक कार्य करने में दक्ष हैं लेकिन हो सकता है कि शिक्षा में आपका ध्यान कम हो। फिर भी आप व्यवहारिक कामों में निपुण होंगे और दूसरों से अपना काम करवाने में समर्थ होंगे।
आप अपने वादे को पूरा करने में विश्वास रखते हैं। आप बुद्धिमान और व्यवहार कुशल व्यक्ति हैं लेकिन यहां स्थित राहू के कुछ अशुभ परिणाम भी कहे गए हैं अत: आपमें बेवजह शक करने की आदत हो सकती है। अच्छे को बुरा और बुरे को अच्छा समझने का भ्रम रह सकता है। आप चाहेंगे कि हर व्यक्ति आपके निर्देशानुसार आचरण करे। इसकारण आप लोगों की नजरों से गिर सकते हैं।

द्वितीय भाव में स्थित राहु का फल (Rahu in Second House)
राहु फल विचार
इस भाव में स्थित राहू आपको शुभ और अशुभ दोनो तरह के फल देगा। आपके ठोडी पर कोई निशान हो सकता है। आप की नाक अपेक्षाकृत बडी होनी चाहिए। लोग आप पर विश्वास करेंगे भले ही आप उनके विश्वास पर खरे न उतर पाएं हांलाकि कि आप बहुत हद तक व्यवहार कुशल होंगे। यह स्थिति आपको धनवान बनाने की संकेतक है। राजा या सरकार के माध्यम से आपको धन की प्राप्ति होगी।
आप सुखी रहेंगे। आप अपने जीवनकाल में गौरव और आदर प्राप्त करेंगे। आपको विदेश से भी धन मिलेगा। कहा गया कि यहां का राहू विदेश में धनार्जन करने में सहायता करता है। आप अपने शत्रुओं का विनाश करने में समर्थ होंगे। आपको देश-विदेश में घूमने का खूब शौक होगा। लेकिन आपके कामों अक्सर रुकावटें आ सकती हैं।
संतान कम संख्या में होती हैं। यहां स्थित राहू आपके कामों में स्थिरता लाने में व्यवधान उत्पन्न करता है। आप झूठ बोलने में अधिक विश्वास कर सकते हैं। व्यर्थ बोलने की आदत हो सकती है। वाणी में किसी प्रकार का दोष हो सकता है। किसी अखाद्य य अपेय का सेवन कर सकते हैं। पैतृक सम्पदा का विनाश कर सकते हैं। पैसों का दुरुपयोग कर सकते हैं। कुपात्रों पर धन खर्च कर सकते हैं।

तृ्तीय भाव में स्थित राहु का फल (Rahu in Third House)
राहु फल विचार
यहां स्थित राहू को अरिष्टनाशक और दु:खनाशक माना गया है। इसलिए आप निरोगी और बलवान होंगे। आपमें बाहुबल खूब होगा। आप पराक्रमी और साहसी होंगे। आप उद्योगी, प्रतापी, दृढविवेकी और खूब यात्राएं करने वाले होंगे। आप विद्वान के साथ-साथ भाग्यवान भी हैं। आप तीव्र बुद्धि लेकिन चंचल स्वभाव के हैं।
आपकी कीर्ति दूर-दूर तक फैलेगी। आप यशस्वी, प्रतिष्ठित और दान, पुण्य पर विश्वास करने वाले व्यक्ति हैं। आप सभी के साथ मित्रवत व्यवहार करना चाहते हैं। आप सभी सभी का आदर करते हैं। आप जानबूझ कर किसी के साथ भेद-भाव नहीं करते। आपका जो भी बर्ताव होता है, शुद्ध अंत:करण से होता है।
भाग्योदय द्वारा आपको सहज ही लाभ मिलने लगता है, आपको अधिक प्रयत्न करने की आवश्यकता नहीं होती। आपके पास नौकर-चाकर, वाहन आदि सभी प्रकार की विलासिता की चीजें होती हैं। लेकिन यहां स्थित राहू के नकारात्मक प्रभाव के कारण आप अभिमानी हो सकते हैं। आप शंकालु और आलसी भी हो सकते हैं। आपको भाइयों का विरोध करने से बचना होगा।

चतुर्थ भाव में स्थित राहु का फल (Rahu in Fourth House)
राहु फल विचार
यहां स्थित राहू आपको साहसी बनाता है और राजसत्ता से माध्यम से सुख दिला सकता है अथवा राजा का प्रेम पात्र बना सकता है। किसी प्राशासनिक व्यक्ति के द्वारा आपका हित साधन हो सकता है। आपको माता से सुख मिलेगा। आपके चित्त में स्थिरता रहेगी। आपके पास विभिन्न प्रकार के वस्त्र और आभूषण होंगे।
आपको अपनी जन्मभूमि में रहने के अवसर कम ही मिलेंगे। आप प्रवासी होंगे या विदेश में रहेंगे। आपको घूमना-फिरना बहुत पसंद होगा। बडी उन्नति की राह में यहां स्थित राहू रुकावटे उत्पन्न करता है लेकिन नौकरी के मामले में राहू राहत देता है। साझेदारी के मामलों में भी यहां स्थित राहू अच्छे परिणाम देता है।
राहू की यह स्थिति कभी-कभी दो विवाह अथवा दो लोगों से आंतरिक लगाव को दर्शाता है। आपका जीवन साथी आपके विपरीत समय में आपका पूरा सहयोग करेगा। पुत्रों की संख्या कम होती है। उम्र के छत्तीसवें वर्ष से लेकर छप्पनवें वर्ष तक भाग्य अपेक्षाकृत अधिक साथ देता है। लेकिन अशुभ प्रभावी राहू आपको मानसिक अशांति देता है। अपने पास सारे सुख के साधन उपलब्ध हो तो भी मन दुखी रह सकता है।

पंचम भाव में स्थित राहु का फल (Rahu in Fifth House)
राहु फल विचार
यहां स्थित राहू आपको तीक्ष्णबुद्धि बनाता है। आपको विभिन्न शास्त्रों का ज्ञान होगा। आप स्वभाव से दयालु, कर्मठ हैं साथ ही आप भाग्यवान भी है। पुत्र प्राप्ति में कुछ व्यवधान आ सकता है। हो सकता है कि पहली संतान के रूप में कन्या संतति की प्राप्ति हो। आप कम्पनी के व्यवसाय में सफल हो सकते हैं।
आप लेखनकला में कुशल हो सकते हैं साथ ही आप प्रसिद्धि प्राप्त करेंगे। कई मामलों में यहां स्थित राहू बुरे परिणाम भी देता है। अशुभता की स्थिति में राहू दिमाग को भ्रमित करता है। संतान को कष्ट या परेशानी होती है। यहां स्थित राहू व्यर्थ में व्यय कराकर निर्धनता की स्थिति उपन्न करता है। आपके शरीर का रंग कम अच्छा हो सकता है।
यह स्थिति आपको कभी-कभी गलत रास्ते पर चलने की प्रेरणा दे सकती है। आपके मन में चिंता और संताप की स्थिति निर्मित हो सकती है। आपकी रुचि विद्या प्राप्त करने में कम रह सकती है। आपको उदररोग अर्थात पेट से सम्बंधित परेशानियां रह सकती हैं। पेट में शूल, गैस आदि रोग और मंदाग्नि रोग हो सकता है। बहुत प्रयास करने पर ही धन संग्रह हो पाता है। जीवन साथी के पक्ष से भी कष्ट मिल सकता है।

छ्टें भाव में स्थित राहु का फल (Rahu in Sixth House)
राहु फल विचार
यहां स्थित राहू अनिष्ट का निवारण करता है अर्थात आपके जीवन के अरिष्ट दूर करता है। आपके जीवन के कष्ट नष्ट होते हैं। आप परक्रमी और शक्ति सम्पन्न होंगे। आप उदारहृदय और धैर्यवान हैं। आप स्थिरचित्त और बुद्धिमान हैं। आप साहसिक और बडे-बडे कामों को अंजाम देने वाले हैं। आप शारीरिक रूप से निरोगी होंगे और दीर्घायु होंगे।
आप शत्रुओं का नाश करने वाले और शत्रुओं को पराजित करने वाले हैं। आप प्रसिद्ध और राज जैसी मान्यता को प्राप्त कर सकते हैं। आप पर सरकार की कृपा रहेगी। दूसरे धर्म के लोगों के द्वारा आपको लाभ मिलेगा और धन प्राप्ति भी होगी। म्लेच्छ जाति के राजा से आपको धन लाभ होगा। आप एक अमीर व्यक्ति हो सकते हैं।
आप वस्त्र, वाहन और आभूषणों से युक्त होंगे। आप भाग्यशाली हैं और आपके पास खूब धन होगा। आपका जीवन साथी अच्छा होगा। लेकिन राहू के दुष्प्रभाव स्वरूप आपकी संगति खराब रह सकती है। आपकी नौकरी में अस्थिरता रह सकती है। ऊपरी बाधाएं या कोई रहस्यमयी बीमारी हो सकती है। मामा, मौसी या चाचा पक्ष से कम सुख रहेगा।

सप्तम भाव में स्थित राहु का फल (Rahu in Seventh House)
राहु फल विचार
यहां स्थित राहू के अधिकांशत: अशुभफल ही बताए गए हैं। लेकिन कुछ शुभफल भी मिलते हैं अत: आप किसी की आधीनता स्वीकार न करके स्वतंत्र रहना चाहेंगे। आपका कार्य कौशल चतुराई से परिपूर्ण रहेगा। आपको घूमने फिरने में बडा आनंद आएगा। आपका विवाह अपेक्षाकृत जल्दी हो सकता है अथवा बहुत देर से होगा। आपका जीवनसाथी अच्छा होगा। आपके और आपके जीवनसाथी के मध्य अच्छा प्रेम रहेगा।
आपकी नौकरी ठीक ठाक चलती है। शुभप्रभाव रहने पर आपका व्यवसाय भी ठीक चलेगा। लेकिन राहू के अशुभफलों के कारण आपका कद नाटा हो सकता है। आप अच्छा काम भी करेंगे तो भी बुराई ही आपके हिस्से में आएगी। आप स्वभाव से क्रोधी और दूसरों से झगडा करने वाले हो सकते हैं। आप कुछ हद तक घमंडी या असंतुष्ट हो सकते हैं। आपका स्वभाव कुछ हद तक उग्र हो सकता है।
आपकी संगति और संबंध खराब व्यक्तियों से हो सकते हैं। दुष्ट व्यक्तियों की संगति में पडकर आप अच्छे व्यक्तियों को कष्ट पहुंचा सकते हैं। आपको लालच और बेकार में घूमने फिरने से बचना चाहिए। जहां तक सम्भव हो धार्मिक बने रहें। जीवनसाथी मन के अनुरूप न मिलने पर आपस में कलह हो सकती है या जीवनसाथी का स्वास्थ्य खराब रह सकता है। कुल मिलाकर दाम्पत्य जीवन में कष्ट रह सकता है।

अष्टम भाव में स्थित राहु का फल (Rahu in Eighth House)
राहु फल विचार
राहू के इस भाव में स्थित होने के कारण आप शरीर से मजबूत होंगे। आपको अपने जन्म स्थान में रहने का समय कम मिलेगा अर्थात आप अधिकांश समय विदेश में रह सकते हैं। आप राजाओ, सरकारी प्रतिनिधियों और पंडितों के आदरणीय होंगे। आप लोगों में माननीय और प्रशंसित होंगे। आप श्रेष्ठ कर्मों को करने वाले व्यक्ति हैं। आपका भाग्योदय छब्बीस से छत्तीस वर्ष के बीच होगा।
राज्यपक्ष से आपको प्रचुर मात्रा में धन की प्राप्ति भी हो सकती है लेकिन कभी-कभी बेकार में धन बर्बाद भी हो जाता है। हांलाकि आप धनवान होंगे। आपके पुत्र संतति की संख्या कम होगी। आपका बुढापा बहुत सुखी रहेगा। यदि आपकी रुचि गाय पालने में होगी तो आपके पास पशुधन पर्याप्त मात्रा में होगा। आपको अपने जीवन से जुडी कई बातों का पूर्वानुमान हो जाएगा।
लेकिन यहां स्थित राहू कई प्रकार केक अशुभफल भी देता है। जिसके कारण आप कुछ हद तक भीरु और आलसी भी हो सकते हैं। आप स्वभाव से जल्दबाज और वाचाल हो सकते हैं। आप कुछ ऐसे कामों में भी लग सकते हैं जो धार्मिक या सामाजिक दृष्टिकोण से बहुत अच्छे न माने गए हों। आपको पैत्रिक धन से वंचित रहना पड सकता है। आपको भाई-बंधुओं से कष्ट मिल सकता है। आपके खर्चे अधिक होने के कारण आपको धन संचय में परेशानी रह सकती है।

नवम भाव में स्थित राहु का फल (Rahu in Ninth House)
राहु फल विचार
यहां स्थित राहू आपको परिश्रमी और ईश्वर पर श्रद्धा रखने वाला बनाता है। आप कृपालु, परिवार को स्नेह करने वाले और गुणवान व्यक्ति हैं। आप तीर्थाटन करने वाले धर्मात्मा और दयालु स्वभाव के हैं। आप सभ्य और सहृदय हैं। आपको यात्राएं करना बहुत पसंद है। आप विद्वान होंगे और अपने गुणों के कारण ही लोगों में पूज्यनीय होंगे। आप लोगों में माननीय और आदरणीय भी होंगे।
आप अपनी चतुरता के कारण भरी सभा में लोगों को चमत्कृत कर सकते हैं। देवताओं और तीर्थों के प्रति आपमें श्रद्धा विश्वास और भक्ति है। आप धन का दान करने वाले और पुण्य कमाने वाले व्यक्ति हैं। यदि किसी ने आप पर कोई उपकार किया है तो आप उसे भूलेंगे नहीं। आप अपने बडे बुजुर्गों के बताए रास्ते पर चलना चाहेंगे और उसी के माध्यम से आप अपनी कीर्ति को निर्मल बनाए रखेंगे।
आपको अपने काम को अधूरा छोडना पसंद नहीं है। आप सुधारवादी विचार वाले, उन्नति आत्मशक्ति वाले और जगत के कल्याण के लिए प्रयत्नशील व्यक्ति हैं। यहां स्थित राहू अशुभ प्रभावी होने पर पापाचार की ओर उन्मुख करता है और धर्म पर श्रद्धा कम कराने की कोशिश करता है अत: ऐसी स्थिति में स्वयं का बचाव करें और ढोंगी न बनें। हमेशा अच्छे वस्त्र धारण करें और अपने भाइयों और मित्रों से अच्छे संबंध बनाए रखें।

दशम भाव में स्थित राहु का फल (Rahu in Tenth House)
राहु फल विचार
यहां स्थित राहू आपको बलवान और निडर बनाता है। आप बुद्धिमान, परोपकारी और कुछ हद तक चिंतायुक्त हो सकते हैं। यदि आप गर्वीले स्वभाव के हैं तो भी यहां स्थित राहू धीरे-धीरे आपके भीतर स्थित घमंड को धीरे-धीरे दूर करवाता है। आपकी रुचि काव्य और कविताओं में होगी। आप एक अच्छे लेखक या सम्पादक भी हो सकते हैं।
आप अपने पूरे जीवनकाल में सफलता, सम्मान, कीर्ति और श्रेष्ठता प्राप्त करते रहेंगे। आप लोक समूह, गांव या नगर के अधिकारी हो सकते हैं। यहां स्थित राहू आपको मंत्री या सेनापति भी बना सकता है। यहां स्थित राहू आपको गंगा स्नान का लाभ देता है। आप यज्ञ कार्य भी करते हैं। आप अपने शत्रुओं का नाश करने वाले व्यक्ति हैं अत: के शत्रु बहुत कम मात्रा में होंगे।
आपके पुत्र संतति कम संख्या में हो सकती है। आप व्यापार में निपुण और यात्राएं करते रहने वाले व्यक्ति हैं। आपको अदालती कामों में विजय मिलेगी। लेकिन यहां स्थित राहू पूर्व अवस्था में कष्ट देता है अत: पूर्व अवस्था में कष्ट भोगकर आप प्रगति करेंगे। आपको आलसी और उत्साहहीन बनने से बचना चाहिए। अपने कामों को नियमित रूप से करना चाहिएव्यर्थ के घमंड और नशे से बचना चाहिए

एकादश भाव में स्थित राहु का फल (Rahu in Eleventh House)
राहु फल विचार
यहां स्थित राहू आपके जीवन के अरिष्टों को कम करता है। आप शारीरिक रूप से पुष्ट होंगे और दीर्घायु होंगे। आप परिश्रमी, विलासी और कवि हृदय भी हो सकते हैं। आप धनवान और विभिन्न भोगों को भोगने वाले होंगे। यदि आप चाहें तो अपनी इन्द्रियों को वश में कर सकते हैं। आप देखने में आकर्षक मितभाषी और शास्त्रों के ज्ञाता होंगे।
आप विद्वान, स्वभाव से विनोदी और चंचल होंगे। आप जिस समाज में रहेंगे, उस समाज के अग्रणी होंगे। आप बडे स्तर पर प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे। आप एक यशस्वी व्यक्ति होंगे। आपकी मित्रता चतुर व्यक्तियों के साथ होगी। आप अपने जीवनकाल में अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त करेंगे। आपको धन धान्य की समृद्धि प्राप्त होगी।
आपके धन लाभ के कुछ तरीके अनैतिक हो सकते हैं। आप विदेशियों के माध्यम से भी धनार्जन कर सकते हैं। आपको विभिन्न प्रकार के वाहनों का सुख मिल सकता है। लेकिन आप कुछ हद तक अभिमानी हो सकते हैं। कुछ बेकार के विवाद में पडकर आप अपनी ऊर्जा का व्यय करेंगे। आपको चाहिए कि धोखा और ठगी के माध्यम से धन न कमाएं अन्यथा संतान से सम्बंधित परेशानी रह सकती है।

द्वादश भाव में स्थित का फल (Rahu in Twelvth House)
राहु फल विचार
यहां स्थित राहू आपको पराक्रमी और यशस्वी बनाता है। आप उदार महत्वाकांक्षी और उच्च आदर्श वाले व्यक्ति हो सकते हैं। आप स्वभाव से मिलनसार हैं। आप अपने परिश्रम के दम पर सुखी रहेंगे। आप एक परोपकारी व्यक्ति हैं। आपके लिए आध्यात्म ज्ञान पाना एक सहज कार्य होगा। आपकी रुचि वेदों और वेदांतों में होगी और आप साधु स्वभाव वाले व्यक्ति हैं।
आपको सार्वजनिक संस्थाओं के माध्यम से लाभ मिल सकता है। यदि आप किसी एक जगह पर भी टिक कर बैठे रहेंगे तो भी आपकी इच्छाओं की पूर्ति होती रहेगी। लेकिन कभी-कभी बडे प्रयास के बाद भी कुछ अनिष्टफल मिलते रहते है और अंत में स्वयमेव शुभफलों में बदल जाते हैं। यहां स्थित राहू आपके शत्रुओं का नाश करता है।
हो सकता है कि आपको प्रारम्भिक आयु में स्थिरता न मिले और आपको आजीविका के लिए बहुत दूर जाना पडे जो कि विदेश भी हो सकता है। क्योंकि यहां स्थित राहू जन्मभूमि से लाभ नहीं दिलवाता। बाहर जाने पर आपका भाग्योदय होगा और आप खूब कमाई करेंगे। हांलाकि आप खर्चे भी खूब करेंगे। विवेकहीनता, छल-कपट, पापपूर्ण विचारों, प्रपंच और नीचकर्म से बचने की सलाह आपको दी जाती है।