Thursday, December 29, 2016

ज्योतिष में राहु का महत्त्व

ज्योतिष में राहु का महत्त्व
भारतीय वैदिक ज्योतष में राहु को मायावी ग्रह के नाम से भी जाना जाता है तथा मुख्य रूप से राहु मायावी विद्याओं तथा मायावी शक्तियों के ही कारक माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त राहु को बिना सोचे समझे मन में आ जाने वाले विचार, बिना सोचे समझे अचानक मुंह से निकल जाने वाली बात, क्षणों में ही भारी लाभ अथवा हानि देने वाले क्षेत्रों जैसे जुआ, लाटरी, घुड़दौड़ पर पैसा लगाना, इंटरनैट तथा इसके माध्यम से होने वाले व्यवसायों तथा ऐसे ही कई अन्य व्यवसायों तथा क्षेत्रों का कारक माना जाता है। नवग्रहों में यह अकेला ही ऐसा ग्रह है जो सबसे कम समय में किसी व्यक्ति को करोड़पति, अरबपति या फिर कंगाल भी बना सकता है तथा इसी लिए इस ग्रह को मायावी ग्रह के नाम से जाना जाता है। अगर आज के युग की बात करें तो इंटरनैट पर कुछ वर्ष पहले साधारण सी दिखने वाली कुछ वैबसाइटें चलाने वाले लोगों को पता भी नहीं था की कुछ ही समय में उन वैबसाइटों के चलते वे करोड़पति अथवा अरबपति बन जाएंगे। किसी लाटरी के माध्यम से अथवा टैलीविज़न पर होने वाले किसी गेम शो के माध्यम से रातों रात कुछ लोगों को धनवान बना देने का काम भी इसी ग्रह का है।

                                                            राहु की अन्य कारक वस्तुओं में लाटरी तथा शेयर बाजार जैसे क्षेत्र, वैज्ञानिक तथा विशेष रूप से वे वैज्ञानिक जो अचानक ही अपने किसी नए अविष्कार के माध्यम से दुनिया भर में प्रसिद्ध हो जाते हैं, इंटरनैट से जुड़े हुए व्यवसाय तथा इन्हें करने वाले लोग, साफ्टवेयर क्षेत्र तथा इससे जुड़े लोग, तम्बाकू का व्यापार तथा सेवन, राजनयिक, राजनेता, राजदूत, विमान चालक, विदेशों में जाकर बसने वाले लोग, अजनबी, चोर, कैदी, नशे का व्यापार करने वाले लोग, सफाई कर्मचारी, कंप्यूटर प्रोग्रामर, ठग, धोखेबाज व्यक्ति, पंछी तथा विशेष रूप से कौवा, ससुराल पक्ष के लोग तथा विशेष रूप से ससुर तथा साला, बिजली का काम करने वाले लोग, कूड़ा-कचरा उठाने वाले लोग, एक आंख से ही देख पाने वाले लोग तथा ऐसे ही अन्य कई प्रकार के क्षेत्र तथा लोग आते हैं।

                                                         राहु का विशेष प्रभाव जातक को परा शक्तियों का ज्ञाता भी बना सकता है तथा किसी प्रकार का चमत्कारी अथवा जादूगर भी बना सकता है। दुनिया में विभिन्न मंचों पर अपने जादू के करतब दिखा कर लोगों को हैरान कर देने वाले जादूगर आम तौर पर इसी ग्रह के विशेष प्रभाव में होते हैं तथा काला जादू करने वाले लोग भी राहु के विशेष प्रभाव में ही होते हैं। राहु के प्रबल प्रभाव वाले जातक बातचीत अथवा बहस में आम तौर पर बुध के जातकों पर भी भारी पड़ जाते हैं तथा बहस के बीच में ही कुछ ऐसी बातें अथवा नए तथ्य सामने ले आते हैं जिससे इनका पलड़ा एकदम से भारी हो जाता है, हालांकि अधिकतर मामलों में बाद में इन्हें खुद भी आश्चर्य होता है कि ऐन मौके पर इन्हें उपयुक्त बात सूझ कैसे गई। ऐसा आम तौर पर राहु महाराज की माया के कारण होता है कि जातक मौका आने पर ऐसी बातें भी कह देता है जो खुद उसकी अपनी जानकारी में नहीं होतीं तथा अचानक ही उसके मुंह से निकल जातीं हैं।

                                                    राहु एक छाया ग्रह हैं तथा मनुष्य के शरीर में राहु वायु तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। ज्योतिष की गणनाओं के लिए ज्योतिषियों का एक वर्ग इन्हें पुरुष ग्रह मानता है जबकि ज्योतिषियों का एक अन्य वर्ग इन्हें स्त्री ग्रह मानता है। कुंडली में शुभ राहु का प्रबल प्रभाव कुंडली धारक को विदेशों की सैर करवा सकता है तथा उसे एक या एक से अधिक विदेशी भाषाओं का ज्ञान भी करवा सकता है। कुंडली में राहु के बलहीन होने से अथवा किसी बुरे ग्रह के प्रभाव में होने से जातक को अपने जीवन में कई बार अचानक आने वाली हानियों तथा समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे जातक बहुत सा धन कमा लेने के बावजूद भी उसे संचित करने में अथवा उस धन से संपत्ति बना लेने में आम तौर पर सक्षम नहीं हो पाते क्योंकि उनका कमाया धन साथ ही साथ खर्च होता रहता है। राहु पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव कुंडली धारक को मानसिक रोगों, अनिद्रा के रोग, बुरे सपने आने की समस्या, त्वचा के रोगों तथा ऐसे ही अन्य कई बिमारियों से पीड़ित कर सकता है।

कुंडली में सरकारी नौकरी के योग

कुंडली में सरकारी नौकरी के योग
व्यक्ति के जीवन में हो रहीं, छोटी या बड़ी हर प्रकार की घटनाओं के लिए कुंडली के ग्रहों का बहुत बड़ा हाथ होता है। कुंडली में जिस प्रकार का ग्रह शक्तिशाली होता है उसी प्रकार के परिणाम भी व्यक्ति को प्राप्त होते हैं। कई बार ऐसा होता है कि अथक मेहनत और परिश्रम के बाद भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी प्राप्ति में सफलता नहीं मिल रही होती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकारी नौकरी का निर्धारण व्यक्ति की योग्यता, शिक्षा, अनुभव के साथ-साथ उसकी जन्मकुंडली में बैठे ग्रह योगों के कारण भी होता है। आइये जानते हैं कि वह कौन-से ग्रह योग होते हैं जो सरकारी नौकरी प्राप्ति में मदद करते हैं।
सरकारी नौकरी के लिए कुंडली में निम्न योगों का होना शुभ माना जाता है-
• कुंडली में दशम स्थान को (दसवां स्थान) को कार्यक्षेत्र के लिए जाना जाता है। सरकारी नौकरी के योग को देखने के लिए इसी घर का आंकलन किया जाता है। दशम स्थान में अगर सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति की दृष्टि पड़ रही होती है तो सरकारी नौकरी का प्रबल योग बन जाता है। कभी-कभी यह भी देखने में आता है कि जातक की कुंडली में दशम में तो यह ग्रह होते हैं लेकिन फिर भी जातक को संघर्ष करना पड़ रहा होता है तो ऐसे में अगर सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति पर किसी पाप ग्रह (अशुभ ग्रह) की दृष्टि पड़ रही होती है तब जातक को सरकारी नौकरी प्राप्ति में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अतः यह जरूरी है कि आपके यह ग्रह पाप ग्रहों से बचे हुए रहें।
• अगर जातक का लग्न मेष, मिथुन, सिंह, वृश्चिक, वृष या तुला है तो ऐसे में शनि ग्रह और गुरु (ब्रहस्पति) का एक-दूसरे से केंद्र या त्रिकोण में होना, सरकारी नौकरी के लिए अच्छा योग उत्पन्न करते हैं।
• केंद्र में अगर चन्द्रमा, ब्रहस्पति एक साथ होते हैं तो उस स्थिति में भी सरकारी नौकरी के लिए अच्छे योग बन जाते हैं। साथ ही साथ इसी तरह चन्द्रमा और मंगल भी अगर केन्द्रस्थ हैं तो सरकारी नौकरी की संभावनायें बढ़ जाती हैं।

कुंडली में दसवें घर के बलवान होने से तथा इस घर पर एक या एक से अधिक शुभ ग्रहों का प्रभाव होने से जातक को अपने करियर क्षेत्र में बड़ी सफलताएं मिलतीं हैं तथा इस घर पर एक या एक से अधिक बुरे ग्रहों का प्रभाव होने से कुंडली धारक को आम तौर पर अपने करियर क्षेत्र में अधिक सफलता नहीं मिल पाती है।
ज्योतिष के अन्दर इस तरह की समस्या के लिए उपयुक्त उपचार भी मौजूद हैं। जातक की कुंडली का पूरा आंकलन करने के बाद ही उपायों को सुझाया जा सकता है। जो शुभ ग्रह कमजोर हैं उन्हें बलवान बनाकर और अशुभ ग्रहों को शांत कर, इस तरह की समस्याओं का अंत कर सकता है ।

अंक ज्योतिष- मूलांक 9

अंक ज्योतिष- मूलांक 9

जिनका जन्म 9, 18, 27 तारीख में किसी भी माह में हुआ है उनका मूलांक 9 है। इनके जीवन का प्रतिनिधित्व मंगल ग्रह करता है। ये मान-सम्मान, मर्यादा व चरित्र पर ज्यादा बल देते हैं। कार्य के प्रति धुन के पक्के, स्वभावत: कुछ क्रोधी, अलग व्यक्तित्व वाले प्राणी होते हैं। झुकना नहीं जानते और सामने वाले को झुकाना इन्हें प्रिय होता है। अनुशासित जीवन इनकी सबसे बड़ी विशेषता है। दाम्पत्य जीवन बहुत उत्तम नहीं होता। ये भाग्य के स्वयं निर्माता और कर्ता-धर्ता होते हैं। पूर्वजों की चली आई संस्कृति और सभ्‍यता के प्रति इनके मन में मोह होता है। 
विवेचना- ग्रह स्वामी- मंगल। श्रेष्ठ समय- 21 मार्च से 27 अप्रैल, 21 अक्टूबर से 27 नवम्बर। श्रेष्ठ तिथियां- 9, 18, 27। श्रेष्ठ वर्ष-9, 18, 27, 36, 45, 54, 63, 72। अनुकूल तिथियां- 3, 12, 21, 30 एवं 6, 15, 24। अनुकूल वर्ष- 3, 12, 21, 30, 39, 48, 57, 66, 75 एवं 6, 15, 24, 33, 42, 51, 60, 69। निर्बल समय- मार्च, मई, जून तथा 18 नवम्बर से 31 दिसम्बर। विपरीत तिथियां- 1, 10, 19, 28। शुभ दिन- मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार। शुभ रंग- लाल, गुलाबी। शुभ रत्न- मूंगा। धातु- सुवर्ण। रोग- रक्तचाप, दुर्घटना, चोट, शरीरिक शिथिलता, हृदय रोग। देव- हनुमान जी। व्रत- मंगलवार। दान पदार्थ- मूंगा, स्वर्ण, गेहूं, रक्त चंदन, लाल वस्त्र, गुड़, घी, कनेर पुष्प, केशर। विवाह संबंध- 15 अक्टूबर से 14 दिसम्बर तथा 15 मई से 14 जून के मध्य जन्मे जातकों से। अनुकूल अंक- 1, 2, 3, 4, 6, 7। प्रतिकूल अंक- 5, 8। व्यवसाय- संगठन, संघ संचालन, नियंत्रण, चिकित्सा, ज्योतिष, धर्मोपदेश, सैन्य विभाग, गोला-बारूद, वकालत, औषधि कार्य, धातु कार्य आदि। अनुकूल दिशा- पूर्व, उत्तर-पूर्व। प्रतिकूल दिशा- दक्षिण, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम। 

अंक ज्योतिष- मूलांक 8

अंक ज्योतिष- मूलांक 8

जिनका जन्म 8, 17, 26 तारीख को किसी माह में हुआ है उनका मूलांक 8 है। इन व्यक्तियों का अद्भुत व अनोखा व्यक्तित्व होता है। शनि इनके जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। ये अपने ऊपर आए जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हैं। जीवन में चाहे जो कुछ करें, चाहे जितना लोगों का भला करें लेकिन लोगों की सहानुभूति कम प्राप्त होती है। ये अपने संपर्क में आए व्यक्तियों का ढाल बनकर सुरक्षा करते हैं। ये लोग गजब के साहसी, लगनशील, चिंतनशील, संजीदा, श्रेष्ठ विचारक, उत्साही, सम्मानप्रिय, धन-धान्य, विशिष्ट कार्य, यश-सम्मान, ऐश्वर्य प्राप्त करते हैं। अंतर्मुखी होने से बाह्य दिखावा इन्हें कम प्रिय होता है। धार्मिक कार्यों में अग्रणी होते हैं। 
विवेचना- स्वामी ग्रह- शनि। शुभ समय 21 दिसम्बर से 19 फरवरी, 21 सितम्बर से 19 अक्टूबर। शुभ तारीख- 8, 17, 26। शुभ वर्ष- 8, 17, 26, 35, 44, 53, 62, 71। अनुकूल तिथियां- 4, 13, 22, 31। अनुकूल वर्ष- 8, 17, 26, 35, 44, 53 एवं 4, 13, 22, 31, 40, 45, 58, 67। निर्बल समय- दिसम्बर, जनवरी, मार्च, अप्रैल। शुभ दिन- शनिवार, रविवार, सोमवार। सर्वोत्तम दिन- शनिवार। शुभ रंग- बैगनी, काला, नीला, आसमानी, भूरा ा अशुभ रंग- चटख लाल रंग। शुभ रत्न- नीलम। धातु- पंचधातु। रोग- वायुरोग, शरीर क्षीणता, कोष्ठबद्धता, गठिया, रक्तचाप, हृदय रोग, रक्ताल्पता, सिर पीड़ा, पेशाब में जलन, गंजापन इत्यादि। देव- शनिदेव। व्रत- शनिवार। दान पदार्थ- भैंस, तिल, तेल, काला वस्त्र, लौह, पंचधातु, उड़द। व्यवसाय- कसरत, खेलकूद का सामान, पुलिस व सैन्य विभाग, ठेकेदारी, वन विभाग, केमिकल्स, लघु उद्योग, वकालत, ज्योतिष, मुर्गीपालन, बागवानी, कोयला, बिजली का कार्य, नेतृत्व, नीति निर्धारण, धर्म कार्य, अध्यापन आदि। शुभ दिशा- दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व। अशुभ दिशा- उत्तर, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम। 

अंक ज्योतिष- मूलांक 7

अंक ज्योतिष- मूलांक 7

जिनका जन्म 7, 16, 25 तारीख को किसी महीने में हुआ है उनका मूलांक 7 है। इनके जीवन का प्रतिनिधित्व नेपच्यून ग्रह करता है। इनके व्यक्ति में अनेकानेक खूबियां होती हैं। इनका व्यक्तित्व सैकड़ों- हजारों लोगों में पहचाना जा सकता है। परिवर्तन इनको प्रिय है। ये नित्य नवीनता के समर्थक होते हैं। इनकी निर्मित योजनाएं शायद ही कभी असफल हों। साहित्य, संगीत, ललित कला या चित्र कला में ये ख्याति अर्जित करते हैं। मौलिकता इनका अनन्य गुण है। धन की अपेक्षा मान-सम्मान का ये ज्यादा ख्याल रखते हैं। इनमें अद्भुत गुणों का समावेश होता है। ये धर्मभीरु, परोपकारी, स्नेही, ठंडे मिजाज वाले, सहिष्णु, सौम्य, सरलचित्त, साहसी, कल्पनाप्रिय, दार्शनिक, अच्छे विचारक और विज्ञान प्रेमी होते हैं। योगसिद्धि, साधना, चिंतन, मनन ही इनका उद्देश्य होता है। 
विवेचना- स्वामी ग्रह- नेपच्यून। शुभ तारीखें- 7, 16, 25। सहायक तारीखें- 2, 11, 20, 29 एवं 1, 10, 19, 28 तथा 4, 13, 21, 31। शुभ समय- 21 जून से 25 जुलाई। शुभ वर्ष- 7, 16, 25, 34, 43, 52, 61, 70वां वर्ष। सहायक वर्ष- 2, 11, 20, 29, 38, 47, 56, 65, 74 तथा 1, 10, 19, 37, 46, 55, 64, 73 एवं 4, 13, 22, 31, 40, 49, 58, 67। निर्बल समय- जनवरी, फरवरी, जुलाई, अगस्त। शुभ दिन- रविवार, सोमवार, बुधवार। सर्वोत्तम दिन- सोमवार। शुभ रंग- हरा, हल्का पीला, सफेद, चमकीला। शुभ रत्न- हीरा, लहसिनया। शुभ धातु- स्वर्ण। रोग- संक्रमण रोग, पसीने की अधिकता, आमाशय दोष, कब्ज, भूख न लगना, अनिद्रा, घबराहट, वातरोग, मंदाग्नि, कफ, रक्त विकार। इष्ट देव- नृसिंह भगवान। व्रत- सोमवार। दान पदार्थ- सोना, लोहा, पंचधातु, जूता, सप्तधान्य, तेल। व्यवसाय- तैराकी, अभिनय, फिल्म, वायुसेना, पर्यटन, ड्राइवरी, जलयान का कार्य, मेडिसिन, चिकित्सा, कृषि, सर्जरी, प्लास्टिक, ललितकला, तरल पदार्थ, कूटनीतिक कार्य, खनिज एवं अनुवादक का कार्य इत्यादि। अनुकूल दिशा- दक्षिण-पूर्व, उत्तर-पूर्व। प्रतिकूल दिशा- उत्तर-पश्चिम। 

अंक ज्योतिष- मूलांक 6

अंक ज्योतिष- मूलांक 6

जिनका जन्म 6, 15, 24 तारीख को किसी महीने में हुआ है उनका मूलांक 6 है। इनके जीवन का प्रतिनिधित्व शुक्र ग्रह करता है। ये स्वाभिमानी, श्रृंगारप्रिय, सुरतिप्रिय, गंभीर, शांत, विश्वासपात्र, उदार और वफादारी से परिपूर्ण होते हैं। दाम्पत्य जीवन सामान्य मधुर रहता है। सदैव प्रसन्न रहने वाले, सुन्दर एवं सुन्दरता के पुजारी, स्वस्थ सुन्दर देह के धनी, पतले, वस्त्राभूषण प्रेमी, दीर्घायु, शक्तिमान और सम्मोहन करने में सिद्धहस्त होते हैं। अतिथि सत्कार में आगे रहते हैं। सांसारिक होते हुए भी चतुर नीतिवान होते हैं। कार्य करने से पहले हानि-लाभ, यश-अपयश, जय-पराजय, सुख-दु:ख, नीति-अनीति के बारे में खूब समझ रखने वाले होते हैं। 
विवेचना- स्वामी ग्रह- शुक्र। शुभ तिथियां- 6, 15, 24। महत्वपूर्ण समय- 20 अप्रैल से 24 मई, 21 सितम्बर से 24 अक्टूबर। सहायक तिथियां- 3, 12, 21, 30 व 9, 18, 27। महत्वपूर्ण वर्ष- 6, 15, 24, 33, 42, 51, 60, 69। सहायक वर्ष- 3, 12, 21, 30, 39, 48, 57, 66, 75 तथा 9, 18, 27, 36, 45, 54, 63, 72वां वर्ष। निर्बल समय- अप्रैल, अक्टूबर, नवम्बर। शुभ दिन- शुक्रवार, मंगलवार, गुरुवार। सर्वाधिक शुभ - शुक्रवार। शुभ रंग- हल्का नीला, आसमानी, गहरा नीला, गुलाबी, चाकलेटी। अशुभ रंग- काला, लाल। शुभ रत्न- हीरा। शुभ धातु- सुवर्ण। रोग- फेफड़े संबंधी, धातु क्षीणता, मूत्र रोग, स्नायु निर्बलता, कफ, जुकाम, कब्जियत। देव- कार्तवीर्यार्जुन। स्त्री देव- संतोषी माता। दान पदार्थ- हीरा, स्वर्ण, चांदी, चावल, मिश्री, श्वेत वस्त्र, चंदन, सुगन्धित द्रव्य। विवाह संबंध- 15 फरवरी से 15 मार्च, 15 मई से 14 जून, 15 अक्टूबर से 18 नवम्बर व 15 अप्रैल से 14 मई के मध्य जन्मे जातको से। मित्र अंक- 2, 4, 9। शत्रु अंक- 1, 3, 5, 7, 8। व्यवसाय- होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, महाजनी कार्य, संगीत, वाद्य, लेखन, नाट्य, वस्त्र व्यवसाय, बागवानी, अभिनय, श्रृंगार प्रसाधन, रेशम, मिष्ठान, साहित्य, सार्वजनिक कार्य, समाज सेवा, यातायात इत्यादि। श्रेष्ठ दिशा- पश्चिम, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम। प्रतिकूल दिशा- दक्षिण पश्चिम। 

अंक ज्योतिष- मूलांक 5

अंक ज्योतिष- मूलांक 5

जिनका जन्म 5, 14, 23 तारीख को हुआ है उनका मूलांक 5 है। इनके जीवन का प्रतिनिधित्व बुध ग्रह करता है। ये विलक्षण तार्किक बुद्धि के होते हैं। इनको प्रभावित करना कठिन है। मित्र बनाने में इनका कोई शानी नहीं है। ये आजीवन मित्रता का निर्वहन करने वाले होते हैं। नित्य नई सूझ-बूझ, युक्तियां, विचार, तर्क, कल्पनाएं संजोने में ये सिद्धहस्त होते हैं। सतत क्रियाशीलता इनका गुण है। ये विचार प्रधान व्यक्ति होते हैं। शरीरिक श्रम की अपेक्षा मानसिक श्रम ज्यादा करते हैं। साहस, हिम्मत और आत्मविश्वास के बल पर जीने वाले होते हैं। ये नौकरी की अपेक्षा व्यवसाय में ज्यादा सफल होते हैं।
विवेचना- स्वामी ग्रह- बुध। श्रेष्ठ प्रभाव- 21 मई से 22 जून तथा 21 अगस्त से 20 सितम्बर के मध्य उत्पन्न जातक। श्रेष्ठ तारीखें- 5, 14, 23। उन्नत समय- 21 मई से 21 जून, 21 अगस्त से 20 सितम्बर। निर्बल समय- मई, सितम्बर, दिसम्बर। शुभ दिन- बुध, सोम, गुरु, शुक्र। सर्वोत्तम दिन- बुधवार। शुभ रंग- हल्का खाकी, सफेद, चमकीला, उज्ज्वल, हरा। शुभ रत्न- पन्ना। रोग- फ्लू, लू लगना, जुकाम, स्नायु निर्बलता, मस्तिष्क रोग, ब्लडप्रेशर, चर्मरोग। श्रेष्ठ वर्ष- 5, 14, 23, 32, 41, 50, 59, 68। देव- भगवान लक्ष्मीनारायण। व्रत- पूर्णिमा, रविवार। दान पदार्थ- पन्ना, स्वर्ण, मूंगा, कांस्य पात्र, हरा वस्त्र, घृत, शक्कर, कर्पूर, हाथी दांत, पंचरत्न। विवाह श्रेष्ठता- 15 अगस्त से 14 सितम्बर, 15 मार्च से 15 अप्रैल व 15 जनवरी से 14 फरवरी के मध्य जन्मे जातकों से। मित्र अंक- 1, 3, 4, 5, 7, 8। शत्रु अंक- 2, 6, 9। व्यवसाय- तार, टेलीफोन विभाग, ज्योतिष, सेल्समैन, बीमा, बैंकिंग, बजट, निर्माण, रेलवे, इंजीनियरिंग, संपादन, तम्बाकू, लेखन, पत्रकारिता, राजनीति, पुस्तक, ट्रांसपोर्ट, पर्यटन आदि। अनुकूल दिशा- उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम। अशुभ दिशा- दक्षिण-पश्चिम। धातु- सुवर्ण, प्लेटिनम।